फर्जी दस्तावेजों के जरिए गेहूं निर्यात को रोकने के लिए सरकार ने नियम सख्त किए

Edited By jyoti choudhary, Updated: 31 May, 2022 11:10 AM

government tightens rules to stop wheat export through fake documents

वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को गेहूं निर्यात के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र लेने के नियमों को सख्त कर दिया। इस कदम का मकसद गड़बड़ी करने वाले व्यापारियों द्वारा गलत दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी की गतिविधियों पर लगाम लगाना है। विदेश व्यापार महानिदेशालय...

नई दिल्लीः वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को गेहूं निर्यात के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र लेने के नियमों को सख्त कर दिया। इस कदम का मकसद गड़बड़ी करने वाले व्यापारियों द्वारा गलत दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी की गतिविधियों पर लगाम लगाना है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 19 मई को अपने सभी क्षेत्रीय प्राधिकरणों को दिशानिर्देश जारी कर पात्र निर्यातकों को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने से पहले नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा था। 

डीजीएफटी को सूत्रों से जानकारी मिली थी कि कुछ निर्यातक पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी कराने को लेकर फर्जीवाड़ा कर पिछली तारीख के साख पत्र जमा कर रहे हैं, जिस पर 13 मई, 2022 या उसके पहले की तारीख है। सूत्रों से मिली जानकारी के बाद डीजीएफटी ने दिशानिर्देश जारी किया। निर्यातकों को निर्यात के लिए अनुबंधों का पंजीकरण (आरसी) प्राप्त करने को 13 मई या उससे पहले जारी वैध अपरिवर्तनीय साख पत्र (एल/सी) के साथ विदेशी बैंकों के साथ संदेश आदान-प्रदान की तारीख जमा करनी होगी। सरकार उन मामलों में गेहूं निर्यात की अनुमति दे रही है जिसके लिए 13 मई या उससे पहले साख पत्र (एलओसी) जारी किए गए थे। 13 मई को खाद्यान्न के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था। 

डीजीएफटी के एक नोटिस के अनुसार इन कदमों और क्षेत्रीय प्राधिकरणों की उचित जांच प्रक्रिया के बावजूद यह आशंका है कि कुछ निर्यातक ‘अनुचित दस्तावेजों' के आधार पर पंजीकरण प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर रहे हैं। ऐसे में व्यवस्था में और जांच-परख की आवश्यकता है। इसमें कहा गया है, ‘‘खामियों को दूर करने के लिए, यह निर्णय किया गया है कि क्षेत्रीय प्राधिकरण सभी साख पत्रों का भौतिक रूप से सत्यापन करेंगे। भले ही उसे मंजूरी मिल गई हो या प्रक्रिया के अधीन हो। इसके लिए अगर जरूरत पड़ी, पेशेवर एजेंसी की मदद ली जा सकती है। भौतिक सत्यापन के साथ प्राप्तकर्ता बैंकों का सत्यापन/अनुमोदन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।'' 

डीजीएफटी ने कहा कि वैसे मामलों में जहां साख पत्र की तिथि 13 मई से पहले है लेकिन भारतीय और विदेशी बैंक के बीच ‘स्विफ्ट' (सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशंस) संदेश 13 मई के बाद का है, क्षेत्रीय प्राधिकरण मामले की पूरी जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर बाहरी विशेषज्ञों की भी मदद ले सकते हैं।

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