US-Iran तनाव का असरः शेयर बाजार में मचा कोहराम, सेंसक्स 1,124 अंक लुढ़का

Edited By Updated: 28 Sep, 2026 03:33 PM

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता के बीच घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को

मुंबईः अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता के बीच घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 1,100 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 22,800 के आसपास पहुंच गया।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,124.02 अंक लुढ़क कर 72,771.72 के स्तर पर आ गया। वहीं निफ्टी में 360.25 अंक की गिरावट रही, ये 22,780.25 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार में गिरावट का असर व्यापक रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। 

शेयर बाजार में गिरावट की वजहें....
 
US-Iran तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के प्रस्ताव को खारिज किए जाने की खबरों के बाद बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम को लेकर सतर्कता बढ़ी। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने दबाव बढ़ाया।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

तनाव बढ़ने के साथ ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2 फीसदी चढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए महंगा क्रूड महंगाई, आयात बिल और कंपनियों के मार्जिन पर असर डाल सकता है।

FII बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेत

भारतीय बाजार पर विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और रुपये में कमजोरी ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल क्रूड, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी फंड फ्लो बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।

बैंकिंग और अन्य सेक्टरों में भी बिकवाली

बाजार की गिरावट सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। बैंकिंग समेत कई प्रमुख सेक्टरों में दबाव देखा गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी कमजोर रहे, जिससे बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का संकेत मिला।
 

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