भारतीय मानक कच्चा तेल 10 साल के उच्च स्तर पर, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

Edited By jyoti choudhary, Updated: 10 Jun, 2022 04:24 PM

indian standard crude oil at 10 year high but petrol and diesel prices stable

भारत की तरफ से खरीदे जाने वाले मानक कच्चे तेल का दाम एक दशक के उच्च स्तर 121 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल का बिक्री मूल्य स्थिर बना हुआ है। पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के आंकड़ों के अनुसार...

नई दिल्लीः भारत की तरफ से खरीदे जाने वाले मानक कच्चे तेल का दाम एक दशक के उच्च स्तर 121 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल का बिक्री मूल्य स्थिर बना हुआ है। पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के आंकड़ों के अनुसार भारतीय मानक कच्चा तेल नौ जून को 121.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पहले कीमत का यह स्तर फरवरी/मार्च 2012 में देखा गया था। 

पीपीएसी के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध के तुरंत बाद भारतीय कच्चा तेल मानक मूल्य 25 फरवरी और 29 मार्च के बीच औसतन 111.86 डॉलर प्रति बैरल रहा। तीस मार्च से 27 अप्रैल के बीच यह औसतन 103.44 डॉलर प्रति बैरल था। अमेरिका जैसे प्रमुख ग्राहकों की मजबूत मांग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बृहस्पतिवार को 13 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई। हालांकि शुक्रवार को इसमें गिरावट आई। अगस्त महीने के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमत 81 सेंट (0.81 डॉलर) कम होकर 122.26 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। 

अमेरिकी वेस्ट टेक्स इंटरमीडिएड क्रूड का भाव जुलाई में 79 सेंट कम होकर 120.72 डॉलर प्रति बैरल रहा। तेल के दाम में घट-बढ़ के बावजूद देश में खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) को प्रत्येक दिन लागत के अनुसार कीमतों को समायोजित करना होता है लेकिन वे नवंबर 2021 से पेट्रोल पंप पर बिकने वाले ईंधन के दाम लागत के मुकाबले कम रखे हुए हैं। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में मानक दाम के अनुसार ईंधन की खुदरा कीमत को रखा जाता है।

उद्योग सूत्रों ने कहा कि स्थानीय पेट्रोल पंपों पर दरें 85 डॉलर प्रति बैरल के मानक के अनुसार है। तेल कंपनियों ने कीमतें नहीं बढ़ायी है क्योंकि वे महंगाई को काबू में लाने के सरकार के प्रयासों में मदद कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में आठ महीने के उच्च स्तर 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गयी। ईंधन खासकर डीजल के दाम में वृद्धि का महंगाई पर व्यापक असर होता है। इससे परिवहन लागत बढ़ती है। फलत: फल और सब्जी समेत सभी जरूरी सामानों के दाम बढ़ जाते हैं। 

सूत्रों ने कहा कि उद्योग पेट्रोल करीब 18 रुपए प्रति लीटर और डीजल 21 रुपए प्रति लीटर के अनुकसान पर बेच रहा है। जहां सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां नुकसान के बावजूद कामकाज जारी रखी हुई हैं, रिलायंस-बीपी और नायरा एनर्जी जैसी निजी क्षेत्र की खुदरा इकाइयों ने घाटा कम करने के लिए परिचालन सीमित किया है। कुछ स्थानों पर नायरा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के मुकाबले तीन रुपए लीटर के अधिक भाव पर ईंधन बेच रही है। दिल्ली में पेट्रोल फिलहाल 96.72 रुपए लीटर और डीजल 89.62 रुपए लीटर है। 

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