Edited By jyoti choudhary,Updated: 17 Sep, 2026 05:20 PM

त्योहारी सीजन में देश में तिलहन और दलहन की कीमतों में तेजी की आशंका बढ़ गई है। पिछले साल के मुकाबले अरहर, चना, सोयाबीन और मूंगफली की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों पर असर पड़ने और
नई दिल्ली: त्योहारी सीजन में देश में तिलहन और दलहन की कीमतों में तेजी की आशंका बढ़ गई है। पिछले साल के मुकाबले अरहर, चना, सोयाबीन और मूंगफली की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों पर असर पड़ने और आगामी रबी सीजन में उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ने से बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
अरहर 30% से ज्यादा महंगी
इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अरहर की थोक कीमतों में 30% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि चना 11% महंगा हो गया है। सोयाबीन की कीमतों में 40% से अधिक और मूंगफली की कीमतों में 50% की तेजी आई है।
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कर्नाटक-महाराष्ट्र में कम बारिश से चिंता
ऑल इंडिया दाल मिलर्स एसोसिएशन के एग्जीक्यूटिव मेंबर रूपेश राठी ने कहा, "कर्नाटक और महाराष्ट्र के आस-पास के इलाकों में अरहर की फसल की हालत को लेकर चिंता बढ़ी है। हाल के हफ्तों में नमी की कमी के कारण फसल पर दबाव बढ़ा है। हालांकि, कीमतें अभी भी मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) लेवल से थोड़ी ही ज्यादा हैं।"
कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश अरहर और चने के मुख्य उत्पादक हैं, जबकि सोयाबीन उत्पादन में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सबसे ऊपर हैं। कर्नाटक पहले ही अपने लगभग 100 तालुकों में सूखा घोषित कर चुका है, जबकि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा के कई जिलों में कुल बारिश में 36% की कमी दर्ज की गई है।
अल नीनो से रबी फसलों पर भी खतरा
महाराष्ट्र के लातूर में दाल प्रोसेसर नितिन कलंत्री के अनुसार, बारिश में कमी और बढ़ती गर्मी फसल की पैदावार को प्रभावित कर सकती है। अगर लंबे समय तक बारिश नहीं हुई तो उत्पादन को लेकर चिंता और बढ़ सकती है।
भारत में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दालों में शामिल चने की बुवाई आगामी रबी सीजन में होगी। बाजार में इसकी कीमतों में तेजी की एक वजह अल नीनो के मजबूत होने की आशंका भी बताई जा रही है। रबी फसलों के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
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NAFED ने बढ़ाया चने का बिक्री भाव
सरकारी एजेंसी NAFED ने करीब ढाई महीने पहले अपने स्टॉक से चना 60 रुपए प्रति किलो के भाव पर बेचना शुरू किया था। हाल में इसकी बिक्री कीमत बढ़ाकर 66 रुपए प्रति किलो कर दी गई है। भारत ऑस्ट्रेलिया से बड़ी मात्रा में चना आयात करता है। हालांकि, इस साल ऑस्ट्रेलिया में चने का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 40-50% कम रहने का अनुमान है। इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई को लेकर भी चिंता बढ़ी है।