China Tax Shock: विदेशी निवेशकों को चीन का बड़ा झटका, 32 साल पुरानी टैक्स छूट खत्म

Edited By Updated: 02 Sep, 2026 01:03 PM

major blow to foreign investors as china scraps 32 year old tax exemption

चीन ने विदेशी निवेशकों के लिए करीब तीन दशक से चली आ रही एक अहम टैक्स छूट खत्म कर दी है। बीजिंग के इस फैसले के बाद चीन में निवेश करने वाले विदेशी व्यक्तियों को अब चीनी कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड और बोनस पर 20% व्यक्तिगत आयकर देना

नई दिल्लीः चीन ने विदेशी निवेशकों के लिए करीब तीन दशक से चली आ रही एक अहम टैक्स छूट खत्म कर दी है। बीजिंग के इस फैसले के बाद चीन में निवेश करने वाले विदेशी व्यक्तियों को अब चीनी कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड और बोनस पर 20% व्यक्तिगत आयकर देना होगा। इस फैसले ने विदेशी निवेशकों के बीच चीन की निवेश व्यवस्था और भविष्य की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, चीन के वित्त मंत्रालय और स्टेट टैक्सेशन एडमिनिस्ट्रेशन ने 1 सितंबर को इस बदलाव की घोषणा की। हालांकि, 20% टैक्स का प्रावधान चीन के कानून में पहले से मौजूद था लेकिन विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए 1994 से इस पर अस्थायी छूट दी जा रही थी। अब बीजिंग ने इस छूट को वापस लेने का फैसला किया है।

विदेशी निवेशकों को अब देना होगा 20% टैक्स

नई व्यवस्था के तहत विदेशी व्यक्तियों को विदेशी निवेश वाली कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड और बोनस पर 20% व्यक्तिगत आयकर देना होगा यानी जिस आय पर पिछले करीब 32 वर्षों से टैक्स छूट मिल रही थी, उस पर अब चीन में कर लागू होगा।

यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब चीन विदेशी निवेश को बनाए रखने और अपनी अर्थव्यवस्था में नई पूंजी आकर्षित करने की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में इस फैसले का असर विदेशी निवेशकों की धारणा पर कितना पड़ता है, यह महत्वपूर्ण सवाल बन गया है।

चीन का तर्क: अब टैक्स छूट की जरूरत नहीं

चीन के अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स छूट की शुरुआत उस दौर में हुई थी, जब चीन आर्थिक विकास के शुरुआती चरण में था और उसे विदेशी पूंजी की ज्यादा जरूरत थी। पेकिंग यूनिवर्सिटी के चाइना सेंटर फॉर पब्लिक फाइनेंस एंड टैक्सेशन के निदेशक लियू यी के मुताबिक, चीन अब उच्च-मानक समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशक केवल टैक्स इंसेंटिव के आधार पर फैसला नहीं करते, बल्कि बाजार का आकार, कानून का शासन और औद्योगिक ढांचा भी उनके लिए अहम हैं।

बीजिंग नेशनल अकाउंटिंग इंस्टीट्यूट की उपाध्यक्ष ली शुहोंग ने भी इस फैसले को टैक्स सिस्टम में निष्पक्षता और एकरूपता बढ़ाने की दिशा में कदम बताया है। उनके अनुसार, इससे टैक्स सिस्टम की खामियों को दूर करने और विदेशी निवेश के लिए अधिक स्थिर वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है।

क्या विदेशी निवेशकों पर वास्तव में बढ़ेगा टैक्स का बोझ?

चीन के विशेषज्ञों का तर्क है कि 20% टैक्स लागू होने से विदेशी निवेशकों की कुल टैक्स देनदारी जरूरी नहीं कि उतनी ही बढ़े। इसकी वजह यह है कि कई देशों में निवेशकों को अपनी वैश्विक आय पर टैक्स देना होता है। ऐसे मामलों में चीन में चुकाया गया टैक्स संबंधित देश के नियमों के तहत टैक्स क्रेडिट के रूप में एडजस्ट किया जा सकता है। डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट यानी DTAA की व्यवस्था भी कुछ मामलों में दोहरे कराधान से राहत दे सकती है।

हालांकि, वास्तविक असर निवेशक के देश, वहां के टैक्स नियमों और संबंधित DTAA की शर्तों पर निर्भर करेगा। इसलिए सभी विदेशी निवेशकों के लिए इसका प्रभाव एक जैसा होना जरूरी नहीं है।

क्या भारत को मिल सकता है फायदा?

चीन के इस फैसले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विदेशी पूंजी के लिए भारत की आकर्षकता बढ़ सकती है? दुनिया की कई बड़ी कंपनियां पहले से ही China Plus One रणनीति अपना रही हैं। इसका मकसद चीन पर सप्लाई चेन की निर्भरता कम करके दूसरे देशों में उत्पादन और निवेश का विस्तार करना है। भारत इस रणनीति के प्रमुख संभावित लाभार्थियों में शामिल है।

भारत का बड़ा घरेलू बाजार, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर और वैश्विक कंपनियों की सप्लाई चेन में जगह बनाने की कोशिश उसे विदेशी निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनाती है।

हालांकि, केवल चीन की टैक्स छूट खत्म होने से विदेशी पूंजी का बड़ा हिस्सा तुरंत भारत की ओर आ जाएगा, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी। निवेशक टैक्स के अलावा बाजार का आकार, कंपनियों का वैल्यूएशन, रेगुलेटरी माहौल, मुद्रा जोखिम, आर्थिक वृद्धि और पूंजी की लागत जैसे कई कारकों को ध्यान में रखते हैं।
 

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!