Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Sep, 2026 12:06 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सख्त Re-KYC नियमों के बीच पेमेंट कंपनियों ने बड़ी राहत की मांग की है। कंपनियों ने केंद्रीय बैंक से Re-KYC प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 सितंबर तक अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है। कंपनियों का कहना है कि छोटे
नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सख्त Re-KYC नियमों के बीच पेमेंट कंपनियों ने बड़ी राहत की मांग की है। कंपनियों ने केंद्रीय बैंक से Re-KYC प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 सितंबर तक अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है। कंपनियों का कहना है कि छोटे दुकानदारों और अनौपचारिक कारोबारियों की दोबारा KYC पूरी करने में कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं।
हजारों छोटे कारोबारियों का KYC बाकी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कई पेमेंट कंपनियों के सामने हजारों छोटे और अनौपचारिक कारोबारियों का Re-KYC पूरा करने का काम अभी बाकी है। Paytm, PhonePe और Google Pay जैसी कंपनियां छोटे शहरों और गांवों में QR कोड और साउंडबॉक्स के जरिए पेमेंट लेने वाले दुकानदारों का दोबारा KYC कर रही हैं लेकिन नए और सख्त KYC नियमों के साथ फिजिकल वेरिफिकेशन की जरूरत ने कंपनियों के लिए काम मुश्किल कर दिया है।
दस्ताजों की कमी भी बड़ी परेशानी
Re-KYC की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे दुकानदारों और अनौपचारिक कारोबारियों के सामने आ रही है। इनमें से कई लोगों के पास KYC के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे कारोबारियों से होने वाले डिजिटल पेमेंट का कुल हिस्सा भले ही बहुत बड़ा न हो लेकिन छोटे शहरों और गांवों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
80% Re-KYC पूरा होने की उम्मीद
पेमेंट कंपनियों को उम्मीद है कि वो 15 सितंबर तक करीब 80% Re-KYC का काम पूरा कर लेंगे लेकिन बाकी कारोबारियों का KYC पूरा करना चुनौती बना हुआ है। इसकी एक बड़ी वजह RBI के नियमों के अनुसार फिजिकल KYC पेमेंट कंपनियों के अपने कर्मचारियों को ही करना होगा। ये काम थर्ड-पार्टी एजेंसियों के कर्मचारियों से नहीं कराया जा सकता, जिस वजह से पिछले एक साल में उन्हें अपने कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाना पड़ी।
क्यों जरूरी है Re-KYC?
RBI के KYC नियमों का उद्देश्य वित्तीय संस्थानों के पास ग्राहकों की सही पहचान और पते की जानकारी सुनिश्चित करना है। इससे धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलती है।
हालांकि कंपनियों को KYC नियमों के अनुपालन के लिए समय दिया गया है, लेकिन बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का दोबारा सत्यापन करना आसान नहीं है। यही वजह है कि पेमेंट कंपनियां RBI से Re-KYC की समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही हैं।