Edited By jyoti choudhary,Updated: 02 Oct, 2026 03:07 PM

दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्सवियर ब्रांड में शामिल नाइकी (Nike) के लिए हाल का दौर चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। गुरुवार के कारोबार में कंपनी का शेयर 6 फीसदी तक टूट गया और 13 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। कंपनी के कमजोर कमाई आंकड़ों ने निवेशकों की...
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्ट्सवियर ब्रांड में शामिल नाइकी (Nike) के लिए हाल का दौर चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। गुरुवार के कारोबार में कंपनी का शेयर 6 फीसदी तक टूट गया और 13 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। कंपनी के कमजोर कमाई आंकड़ों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
Nike के शेयर अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 82% तक नीचे आ चुके हैं। इस गिरावट के साथ कंपनी के बाजार मूल्य में लगभग 230 अरब डॉलर की कमी आई है। माइकल जॉर्डन (Michael Jordan), टाइगर वुड्स (Tiger Woods), सेरेना विलियम्स (Serena Williams) और क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo) जैसे बड़े खिलाड़ियों से जुड़ा यह ब्रांड कभी स्पोर्ट्सवियर बाजार में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाना जाता था। अब कंपनी को बिक्री में कमजोरी और बदलती उपभोक्ता पसंद जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
रणनीतिक फैसले पड़े भारी
पिछले कुछ वर्षों में Nike ने अपने कारोबार की रणनीति में बड़े बदलाव किए। कंपनी ने ऑनलाइन बिक्री और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने पर ज्यादा जोर दिया और कई पारंपरिक रिटेल साझेदारों से दूरी बनाई।
स्पोर्ट्स रिटेल इंडस्ट्री के एनालिस्ट और सलाहकार Matt Powell के मुताबिक, कंपनी के कुछ रणनीतिक फैसलों ने उसकी मौजूदा मुश्किलों को बढ़ाया। इनमें रिटेलर्स के साथ रिश्तों में कमी और सीमित संस्करण वाले उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाना शामिल है।
कंपनी ने नए उत्पादों के विकास की बजाय अपने डिजिटल कारोबार को मजबूत करने पर भी काफी जोर दिया। इस बीच प्रतिस्पर्धी ब्रांड्स ने नए डिजाइन और तेजी से बदलते फैशन ट्रेंड्स के जरिए बाजार में अपनी जगह मजबूत कर ली।
चीन में भी कमजोर हुई मांग
Nike के लिए चीन एक महत्वपूर्ण बाजार रहा है लेकिन वहां मांग में कमजोरी ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ाई हैं। कमजोर बिक्री के बीच कंपनी ने लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने जैसे कदम उठाए हैं।
उधर, On और Hoka जैसे नए और तेजी से बढ़ते फुटवियर ब्रांड्स ने रनिंग और लाइफस्टाइल सेगमेंट में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। कई स्टोर्स में इन ब्रांड्स की बढ़ती हिस्सेदारी Nike के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।