5 रुपए महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल, घाटे में तेल कंपनियां, ट्रांसपोर्ट से लेकर खाने तक महंगाई का खतरा

Edited By Updated: 06 Jun, 2026 01:46 PM

oil companies facing a loss of 610 crore fuel prices up

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब ग्राहकों को और झटका लग सकता है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में फ्यूल के दामों में 5 रुपए प्रति लीटर की और तेजी आ सकती है। इसकी वजह है पश्चिम एशिया में जारी तनाव से कच्चे तेल में तेजी,

बिजनेस डेस्कः पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब ग्राहकों को और झटका लग सकता है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में फ्यूल के दामों में 5 रुपए प्रति लीटर की और तेजी आ सकती है। इसकी वजह है पश्चिम एशिया में जारी तनाव से कच्चे तेल में तेजी, जिसके चलते सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को हर दिन लगभग 610 करोड़ का घाटा हो रहा है।

ICRA का अनुमान

रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड, प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बावजूद तेल कंपनियों को अभी भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान है कि पेट्रोल पर करीब 5.5 रुपए और डीजल पर 4.5 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

यह भी पढ़ें: निवेशकों के डूब $2 ट्रिलियन, अमेरिकी शेयर बाजार में क्यों  आई इतनी बड़ी गिरावट?

विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 5 प्रति लीटर की और बढ़ोतरी से OMCs को ऑटो फ्यूल की बिक्री पर ‘ब्रेक-ईवन’ (यानी लागत और कमाई बराबर होने) की स्थिति के करीब पहुंचने में मदद मिल सकती है।

कितना हो रहा नुकसान

ICRA का अनुमान है कि यह नुकसान सिर्फ ऑटो फ्यूल तक ही सीमित नहीं है बल्कि LPG और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी तेल कंपनियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। LPG पर प्रति सिलेंडर करीब 680 रुपए और ATF पर लगभग 93 करोड़ रुपए प्रतिदिन की अंडर-रिकवरी बनी हुई है।

क्रिसिल रेटिंग्स के विश्लेषण के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और OMCs अपना घाटा कम करना जारी रखती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल बढ़ोतरी 10 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच सकती है।

यह भी पढ़ें: लगातार तीसरे दिन टूटी चांदी, सोना भी फिसला, चेक करें कितनी आई गिरावट

मैक्रोइकॉनॉमिक असर

क्रिसिल ने कहा कि इसका व्यापक असर पूरी इकोनॉमी पर पड़ेगा क्योंकि ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ेगी, जिससे खाने-पीने की चीजों और कोर महंगाई, दोनों में बढ़ोतरी होगी। 

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ सकता है। नतीजतन, ट्रांसपोर्ट पर निर्भर सेक्टरों को ज्यादा कॉस्ट का सामना करना पड़ सकता है। क्रिसिल का कहना है कि डेयरी प्रोडक्ट्स, फल, दालें, मसाले, चाय, कॉफी, अंडे, मीट और मछली जैसी चीज़ों की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने से रिटेल कीमतें भी बढ़ रही हैं।

 

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!