पीएम मोदी ने किसानों से की जीरो बजट फार्मिंग अपनाने की अपील, जानिए क्या है प्राकृतिक खेती

Edited By jyoti choudhary, Updated: 13 Dec, 2021 12:42 PM

pm modi appeals to farmers to adopt zero budget farming

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 दिसंबर को प्राकृतिक खेती पर एक बड़ा आयोजन करने जा रहे हैं। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती या जीरो बजट फार्मिंग अपनाने की सलाह दी। इससे पानी की बचत भी होती है और उत्पादन भी बढ़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे...

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 दिसंबर को प्राकृतिक खेती पर एक बड़ा आयोजन करने जा रहे हैं। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती या जीरो बजट फार्मिंग अपनाने की सलाह दी। इससे पानी की बचत भी होती है और उत्पादन भी बढ़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम से जुड़े और मुझे पूरा यकीन है कि उसे देखने के बाद वे अपने खेत में इसे करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

क्या है जीरो बजट फार्मिंग
जीरो बजट प्राकृतिक खेती (ZBNF) करने का एक तरीका है जिसमें बिना किसी लागत के खेती की जाती है। कुल मिलाकर कहें तो यह पूरी तरह से प्राकृतिक खेती है। जीरो बजट प्राकृतिक खेती बाहर से किसी भी उत्पाद का कृषि में निवेश को खारिज करता है। जीरो बजट प्राकृतिक खेती में देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्र का उपयोग करते हैं। इस विधि से 30 एकड़ जमीन पर खेती के लिए मात्र 1 देशी गाय के गोबर और गोमूत्र की आवश्यकता होती है।

ZBNF एक कृषि पद्धति है जो प्रकृति के अनुरूप फसल उगाने में विश्वास करती है। इस अवधारणा को 1990 के दशक के मध्य में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों और गहन सिंचाई द्वारा संचालित हरित क्रांति के तरीकों के विकल्प के रूप में पद्म श्री पुरस्कार विजेता सुभाष पालेकर द्वारा प्रचारित किया गया था।

देसी प्रजाति के गोवंश की होगी सुरक्षा
जीरो बजट फार्मिंग में गौपालन का भी विशेष महत्व है क्योंकि देशी प्रजाति के गौवंश के गोबर तथा गोमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत, जामन बीजामृत बनाया जाता है। इनका खेत में उपयोग करने से मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि के साथ-साथ जैविक ‘गतिविधियों का विस्तार होता है। जीवामृत का उपयोग सिंचाई के साथ या एक से दो बार खेत में छिड़काव किया जा सकता है। जबकि बीजामृत का इस्तेमाल बीजों को उपचारित करने में किया जाता है।

देसी बीज का होता है इस्तेमाल
जीरो बजट प्राकृतिक खेती में हाइब्रिड बीज का उपयोग नहीं किया जाता है। इसके स्थान पर पारस्परिक देशी उन्नतशील प्रजातियों का प्रयोग किया जाता है। इस विधि से खेती करने से किसान को बाजार से खाद एवं उर्वरक, कीटनाशक तथा बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है। जिससे उत्पादन की लागत शून्य रहती है। एकल कृषि पद्धति को छोड़कर बहुफसली की खेती करते हैं यानि एक बार में एक फसल न उगाकर उसके साथ कई फसल उगाते हैं। जीरो बजट प्राकृतिक खेती को करने के लिए 4 तकनीकों का प्रयोग खेती करने के दौरान किया जाता है।
 

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