जून में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में आई हल्की गिरावट

Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 Jul, 2022 01:20 PM

slight decline in manufacturing activities in june

जून में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में थोड़ी सुस्ती आई है। S&P Global India Manufacturing Purchasing Manager''s Index (PMI) से इसका संकेत मिला है। यह इंडेक्स जून में थोड़ा गिरकर 53.9 पर आ गया। मई में यह 54.6 था।

बिजनेस डेस्कः जून में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में थोड़ी सुस्ती आई है। S&P Global India Manufacturing Purchasing Manager's Index (PMI) से इसका संकेत मिला है। यह इंडेक्स जून में थोड़ा गिरकर 53.9 पर आ गया। मई में यह 54.6 था।

हालांकि, PMI 50 के ऊपर बने रहने का मतलब एक्टिविटी में एक्सपैंशन है। इसके 50 से नीचे रहने पर एक्टिविटी में कॉन्ट्रैक्शन का संकेत मिलता है। अच्छी बात यह है कि PMI लगातार 12वीं बार 50 से ऊपर रहा है।

S&P Global ने कहा, 'जून में इंडियन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रिकवरी जारी रही। डोमेस्टिक और इंटरनेशनल क्लाइंट की मजबूत मांग से ऐसा हुआ। हालांकि प्राइस पर बहुत दबाव की वजह से टोटल सेल्स और प्रोडक्शन की ग्रोथ थोड़ी कम रही।' कोरोना की महामारी 2020 में शुरू होने के बाद इंडियन इकोनॉमी में गिरावट देखने को मिली थी। अब इकोनॉमी में रिकवरी आ रही है। RBI ने इस फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

प्रोडक्शन, फैक्ट्री ऑर्डर, पर्चेजेज स्टॉक और एंप्लॉयमेंट में कम वृद्धि की वजह से जून में मैन्युफैक्चरिंग PMI की ग्रोथ कम रही। उधर, केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इकोनॉमी में रिकवरी तो आ रही है लेकिन अब भी इसके रास्ते में कई बाधाएं हैं। इनमें वैश्विक स्थितियां और फाइनेंशियल मार्केट्स में उतार-चढ़ाव शामिल हैं। सबसे बड़ी बाधा महंगाई है। यह पिछले चार महीने से रिजर्व बैंक के टारगेट से ऊपर बना हुआ है। मजबूरन RBI को इंटरेस्ट रेट बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है। जून में पर्चेज प्राइस और आउटपुट चार्ज इनफ्लेशन गिरकर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया लेकिन यह अब भी अपने लॉन्ग-रन एवरेजेज के मुकाबले ज्यादा है। 

S&P Global Market Intelligence की इकोनॉमिक एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डे लिमा ने कहा, 'कई मानकों पर ग्रोथ में सुस्ती दिखी है। इनमें फैक्ट्री ऑर्डर, प्रोडक्शन, एक्सपोर्ट्स, इनपुट बाइंग और एंप्लॉयमेंट शामिल हैं। इसकी वजह यह है कि क्लाइंट्स और बिजनेसेज ने हाई इनफ्लेशन के बीच खर्च में कमी की है।' उन्होंने कहा, 'सप्लाई चेन के बारे में अच्छी खबर है। इनपुट लीड टाइम में कमी आई है। कोविड-19 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। ऐसा लगता है कि इससे इनपुट कॉस्ट्स के महंगा होने का दबाव घटा है। इसके बावजूद कंपनियां इनफ्लेशन को लेकर बहुत फिक्रमंद हैं।

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