शेयर बाजार बना रॉकेट, इन 5 वजहों से मार्केट में आई तेजी, निवेशकों को 5 लाख करोड़ का फायदा

Edited By Updated: 25 May, 2026 11:28 AM

stock market soars 5 reasons behind the rally investors gain 5 lakh crore

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसका सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। भारतीय समयानुसार सुबह 9:20 बजे तक ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड करीब 6 फीसदी तक टूट गए। इसके बाद घरेलू शेयर...

बिजनेस डेस्कः सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसका सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। भारतीय समयानुसार सुबह 9:20 बजे तक ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड करीब 6 फीसदी तक टूट गए। इसके बाद घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई।

बाजार खुलते ही सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी 50 में 250 अंकों से अधिक की बढ़त देखने को मिली। सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स 832 अंकों की तेजी के साथ 76,247 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 226 अंक चढ़कर 23,945.60 पर पहुंच गया। इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही मिनटों में करीब 5 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर लगभग 468 लाख करोड़ रुपए हो गया।

बाजार में तेजी के प्रमुख कारण

1. अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर शांति समझौते के मसौदे पर काफी प्रगति हुई है। इस बयान से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना।

2. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट

शांति वार्ता की उम्मीदों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से नीचे आईं। ब्रेंट क्रूड 5% से ज्यादा गिरकर 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI क्रूड करीब 6% टूटकर 91.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत के लिए यह राहत की खबर है क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है।

3. वैश्विक बाजारों में तेजी

एशियाई बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिली। जापान का Nikkei 225 पहली बार 65,000 के पार पहुंच गया। चीन और ताइवान के बाजारों में भी मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी फ्यूचर्स भी बढ़त में कारोबार करते दिखे।

4. रुपए में मजबूती

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.37% मजबूत होकर 95.34 पर खुला। तेल की कीमतों में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप से रुपये को सहारा मिला, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

5. बॉन्ड यील्ड में गिरावट

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड घटकर 4.558% पर आ गई। बॉन्ड यील्ड कम होने से निवेशक शेयर बाजार की ओर रुख करते हैं, जिससे इक्विटी बाजार को समर्थन मिला।

FIIs की बिकवाली बनी चिंता

हालांकि बाजार में तेजी देखने को मिली, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार के मुताबिक, 23 मई 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की कुल बिकवाली 2.22 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है, जो 2025 की कुल बिकवाली से भी अधिक है।
 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!