Edited By jyoti choudhary,Updated: 24 Sep, 2026 03:33 PM

गुरुवार को शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 1,247.71 अंक या 1.67 फीसदी की गिरावट के साथ 73,580.54 पर आ गया। वहीं निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 फीसदी गिरकर 23,063.10 के स्तर पर बंद हुआ। फार्मा को छोड़कर ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स...
मुंबईः गुरुवार को शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 1,247.71 अंक या 1.67 फीसदी की गिरावट के साथ 73,580.54 पर आ गया। वहीं निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 फीसदी गिरकर 23,063.10 के स्तर पर बंद हुआ। फार्मा को छोड़कर ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे। बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण.....
बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल
अमेरिका में 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। ब्याज दरों के बढ़ने की संभावना के कारण ऐसा हुआ है। यह यील्ड 13.89 बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.106% हो गई, जो 2007 के बाद सबसे ज्यादा है और अप्रैल 2025 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी बढ़त थी। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डेट मार्केट ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। इससे अक्सर इक्विटी मार्केट में कुछ गिरावट आती है।
कच्चा तेल में उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी के बावजूद ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट करीब 4 फीसदी उछला था। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर मतभेद बने रहने से तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए तेल महंगा होने से आयात बिल, रुपए और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
फेड के ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें
यूएस फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण शेयर बाजार में गिरावट और बढ़ गई। फेड फंड्स फ्यूचर्स ट्रेडर्स अब अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की 66% संभावना मान रहे हैं। अमेरिका में हाल में डीजल और पेट्रोल की कीमत में काफी तेजी आई है। महंगाई को रोकने के लिए फेड ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है।
बैंक और फाइनेंशियल शेयरों में भारी बिकवाली
बैंकिंग, फाइनेंशियल और इंश्योरेंस शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव बना रहे हैं। इसकी एक वजह IRDAI की ओर से कमीशन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है। प्रस्ताव में कमीशन भुगतान पर सीमा लगाने, इसे प्रोडक्ट की जटिलता से जोड़ने और जीवन बीमा कंपनियों के कमीशन को पॉलिसी के पहले साल से आगे फैलाने जैसे बदलाव शामिल हैं।
HDFC Life, Bajaj Finance, Axis Bank और Bajaj Finserv निफ्टी 50 के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में रहे। इनमें शुरुआती कारोबार में 8.5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
रुपए में गिरावट
तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में भारी उछाल के बीच शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिका डॉलर के मुकाबले 14 पैसे गिरकर 95.87 पर आ गया। LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी ने कहा, "रुपया 95.60-95.95 के दायरे में बना हुआ है और भारतीय बाजारों में FII की लगातार बिकवाली से सेंटीमेंट सतर्क बना हुआ है। आगे चलकर, US-ईरान घटनाक्रम, शी जिनपिंग की US यात्रा और UN बैठक के अपडेट करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं।"