उद्योग की पैकेज मांग पर सिफारिशों को अंतिम रूप दे रहा है चाय बोर्ड

Edited By jyoti choudhary, Updated: 06 May, 2022 06:09 PM

tea board is finalizing the recommendations on the package

चाय बोर्ड इस क्षेत्र को लाभकारी बनाए रखने के लिए एक विशेष वित्तीय पैकेज की उद्योग की मांग पर वाणिज्य मंत्रालय के लिए अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दे रहा है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। चाय उद्योग के प्रतिनिधियों ने मार्च में वाणिज्य...

कोलकाताः चाय बोर्ड इस क्षेत्र को लाभकारी बनाए रखने के लिए एक विशेष वित्तीय पैकेज की उद्योग की मांग पर वाणिज्य मंत्रालय के लिए अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दे रहा है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। चाय उद्योग के प्रतिनिधियों ने मार्च में वाणिज्य मामलों की संसद की स्थायी समिति से मुलाकात की थी और इस क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों, विशेष रूप से दार्जिलिंग की चुनौतियों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा था। 

प्रतिनिधियों ने कहा था कि उत्पादन पहले के 1.2 करोड़ किलो से घटकर मौजूदा समय में 60 लाख किलो रह गया है। चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष सौरव पहाड़ी ने कहा, हम विशेष वित्तीय पैकेज की उद्योग की मांग पर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने मे लगे हैं। उन्होंने कहा कि चाय उद्योग ने आवश्यक वित्तीय सहायता की मात्रा के बारे में कोई उल्लेख नहीं किया है। पहाड़ी ने कहा कि गिरते निर्यात स्तर को बढ़ाने के लिए चाय बोर्ड नए संभावित बाजारों का फायदा लेने के लिए चाय उद्योग के सहयोग से प्रचार गतिविधियों में लगा हुआ है। 

अब तक, सीआईएस ब्लॉक (स्वतंत्र देशों का राष्ट्रकुल) और ईरान भारतीय चाय के प्रमुख आयातक थे। यह पूछे जाने पर कि क्या श्रीलंका में आर्थिक संकट से भारतीय चाय निर्यातकों को मदद मिलेगी, भारतीय चाय संघ (टीएआई) के महासचिव पीके भट्टाचार्य ने कहा कि श्रीलंका ज्यादातर पारंपरिक किस्म के चाय का उत्पादन करता है जबकि भारतीय उत्पादन का अधिकांश हिस्सा सीटीसी का है। 

उन्होंने कहा, ‘‘श्रीलंका मुख्य रूप से एक पारंपरिक चाय उत्पादक देश है जबकि भारत के पारंपरिक चाय की हिस्सेदारी कुल उत्पादन का केवल 10 प्रतिशत है। जब तक भारत अपने पारंपरिक उत्पादन में वृद्धि नहीं करता है, तब तक निर्यात बाजारों पर बड़े पैमाने पर कब्जा करने के लिए श्रीलंकाई संकट का लाभ उठाना मुश्किल होगा।'' 

भारत का चाय का उत्पादन लगभग 120 करोड़ किलोग्राम है, जबकि श्रीलंका का लगभग 30 करोड़ किलोग्राम है। भारतीय चाय निर्यात संघ (आईटीईए) के अध्यक्ष अंशुमान कनोरिया ने कहा, ‘‘श्रीलंका संकट के कारण पारंपरिक किस्म की मांग और कीमतें अब काफी बेहतर हैं। भारतीय पारंपरिक किस्म को निर्यात बाजार में मांग बढ़ रही है और उम्मीद है कि उत्पादक अब धीरे-धीरे इस विशेष किस्म के चाय तैयार करने की ओर जाएंगे।'' 
 

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