Edited By jyoti choudhary,Updated: 19 Sep, 2026 06:09 PM

इस साल का त्योहारी सीजन भारतीय निर्यातकों के लिए पिछले साल के मुकाबले ज्यादा कारोबार लेकर आता दिख रहा है। अमरीका में क्रिसमस और न्यू ईयर की तैयारियों के लिए भारतीय कपड़ा निर्यातकों को मिलने वाले ऑर्डर में करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी
नई दिल्ली: इस साल का त्योहारी सीजन भारतीय निर्यातकों के लिए पिछले साल के मुकाबले ज्यादा कारोबार लेकर आता दिख रहा है। अमरीका में क्रिसमस और न्यू ईयर की तैयारियों के लिए भारतीय कपड़ा निर्यातकों को मिलने वाले ऑर्डर में करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं यूरोप में दिवाली के मद्देनजर तैयार खाद्य उत्पादों की मांग में करीब 20 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। निर्यातकों के अनुसार, पश्चिमी देशों में त्योहारों की खरीदारी और भारत में त्योहारी मांग ने कारोबार को एक साथ गति दी है।
कपड़ा, हस्तशिल्प और कालीन निर्यात में भी तेजी
एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात में 6.39 फीसदी, हस्तशिल्प निर्यात में 29 फीसदी और कालीन निर्यात में 5 फीसदी की वृद्धि हुई। सैनाथन टेक्सटाइल्स के कार्यकारी निदेशक सम्मीर डी. दत्तानी के मुताबिक इस तिमाही में घरेलू खपत के साथ-साथ पश्चिमी बाजारों के लिए निर्यात करने वाले ग्राहकों की खरीदारी भी मजबूत रही है। क्रिसमस, न्यू ईयर और भारतीय त्योहारी सीजन के कारण मांग को सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि धागे की मांग भी काफी मजबूत बनी हुई है। इस धागे का इस्तेमाल घरेलू स्तर पर कपड़े, बेडशीट और अन्य उत्पाद बनाने में होता है, जिन्हें बाद में निर्यात किया जाता है।
यूरोप में भारतीय मिठाइयों और रेडी-टू-ईट उत्पादों की मांग
खाद्य निर्यात के मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक है। ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार काजू कतली, लड्डू, हलवा, भुजिया, नमकीन मिश्रण, मुरुक्कू, सूखे मेवे, चावल, मसाले, घी और अचार जैसे पारंपरिक भारतीय उत्पादों की विदेशों में मांग बनी हुई है। इसके साथ ही तैयार खाने और तुरंत पकाकर खाने वाले खाद्य उत्पादों की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। मीडिया को दिए एक बयान में काउंसिल के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों के साथ रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पादों की बढ़ती मांग भारतीय खाद्य एवं पेय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
खाड़ी देशों में भारतीय खाद्य उत्पादों की खास मांग
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जी.सी.सी.) क्षेत्र भारतीय त्योहारी खाद्य उत्पादों के लिए सबसे प्रमुख बाजारों में शामिल है। कुवैत, ओमान और बहरीन में आयातकों तथा वितरकों की ओर से मिठाइयों, सूखे मेवों, नमकीन और सुविधाजनक खाद्य उत्पादों की खरीद जारी है। कुवैत में मिठाई, घी, पनीर, पेय पदार्थ, मसाले, अचार, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ और सूखे मेवों की मांग देखी जा रही है। ओमान में भारतीय चावल, मसाले, दालें और अचार खरीदे जा रहे हैं, जबकि बहरीन में पारंपरिक भारतीय मिठाइयों और नमकीन की मांग मजबूत बनी हुई है।
निर्यातकों के सामने परिवहन और शुल्क की चुनौती
हालांकि बढ़ती मांग के बावजूद निर्यातकों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। महंगा मालभाड़ा, कंटेनरों की कमी और अमरीका की धारा 301 के तहत लगाए गए शुल्क कारोबार पर दबाव डाल रहे हैं। खाड़ी देशों में सीमा शुल्क जांच में देरी, खाद्य सुरक्षा और आयात नियमों का पालन तथा जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की सीमित उपयोग अवधि भी चिंता का विषय है। फैडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के महानिदेशक अजय सहाय के अनुसार, विभिन्न देशों में खरीदार आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच अपने आपूर्तिकर्ताओं में विविधता ला रहे हैं।
तैयार खाद्य उत्पादों का निर्यात भी बढ़ा
भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में भी लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेडी-टू-ईट और पके हुए खाद्य उत्पादों का निर्यात 16 फीसदी बढ़कर 2.4 अरब डॉलर हो गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 2.1 अरब डॉलर था। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय पारंपरिक खाद्य पदार्थों के साथ पैक्ड और सुविधाजनक खाद्य उत्पाद भी विदेशी बाजारों में अपनी जगह तेजी से बना रहे हैं।