महंगाई की चिंता के बीच जून तिमाही में शहरी परिवारों ने एफएमसीजी खर्च घटाया: रिपोर्ट

Edited By Updated: 02 Oct, 2026 01:37 PM

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चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले एफएमसीजी उत्पादों पर शहरी परिवारों के खर्च में कमी आई। ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों से जुड़ी चिंता के बीच लोगों ने गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी कम कर दी। वर्ल्डपैनल (पूर्व में कंतार) की...

नई दिल्लीः चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले एफएमसीजी उत्पादों पर शहरी परिवारों के खर्च में कमी आई। ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों से जुड़ी चिंता के बीच लोगों ने गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी कम कर दी। वर्ल्डपैनल (पूर्व में कंतार) की चौथी वार्षिक 'खर्चा' रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में शहरी परिवारों का तिमाही खर्च सालाना आधार पर चार प्रतिशत घट गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसमें 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

इस अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि समृद्ध और कम समृद्ध शहरी परिवारों के खर्च में चार प्रतिशत की कमी आई। समृद्ध शहरी परिवारों का औसत तिमाही खर्च 81,759 रुपए रहा जबकि कम समृद्ध शहरी परिवारों का खर्च 49,832 रुपए रहा। इसके विपरीत, ग्रामीण परिवारों का खर्च 15 प्रतिशत बढ़कर 53,760 रुपए प्रति तिमाही हो गया। जून तिमाही में परिवारों का औसत खर्च 13 प्रतिशत बढ़कर 59,857 रुपए हो गया। इस साल खर्च में पूरी वृद्धि ग्रामीण परिवारों की तरफ से की गई, जबकि शहरी परिवारों का खर्च घट गया। 

घरेलू बजट में किराने के सामान का हिस्सा पिछले साल के 23.5 प्रतिशत से घटकर 22 प्रतिशत रह गया। वहीं, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं का हिस्सा करीब छह प्रतिशत हो गया जो पहले दो प्रतिशत से कम था। रिपोर्ट ने इसका एक कारण जीएसटी ढांचे में अनुकूल बदलाव को बताया। करीब 6,000 शहरी और ग्रामीण परिवारों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 में थोड़ा सुधरने के बाद आर्थिक स्थिति को लेकर लोगों की धारणा फिर कमजोर हुई है। करीब 56 प्रतिशत लोगों ने कहा कि स्थिति मुश्किल है लेकिन संभाली जा सकती है, जबकि 16 प्रतिशत ने कहा कि उन पर कोई असर नहीं पड़ा है। 

अगले तीन महीनों में अपनी स्थिति और खराब होने की आशंका जताने वालों का अनुपात दिसंबर के नौ प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट कहती है, ''86 प्रतिशत खरीदारों ने कहा कि वे किराना खरीदते समय केवल जरूरी सामान लेते हैं, जबकि 74 प्रतिशत ने बजट के भीतर खरीदारी करने की बात कही। एक साल पहले यह आंकड़ा 69 प्रतिशत था।'' अध्ययन में कहा गया कि ईंधन और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी खरीदारों की प्रमुख चिंताओं में शामिल रहा। करीब 59 प्रतिशत परिवारों ने ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव को सबसे बड़ी वैश्विक चिंता बताया। 

करीब 64 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इन परिस्थितियों ने उनकी खरीदारी या खर्च करने की आदत बदली है, जबकि 48 प्रतिशत ने गैर-जरूरी खरीदारी कम कर दी। 'खर्चा' रिपोर्ट का चौथा संस्करण अप्रैल महीने में किए गए अध्ययन पर आधारित है। इसमें घर में एफएमसीजी खरीदारी से संबंधित निर्णय लेने वाली गृहिणियों से प्रतिक्रिया ली गई। अध्ययन में परिवारों के खर्च, खरीदारी के व्यवहार में बदलाव, उसके कारणों, मौजूदा धारणा और भविष्य की उम्मीदों को शामिल किया गया। इस बार एलपीजी संकट और पश्चिम एशिया युद्ध के असर पर भी एक अलग खंड जोड़ा गया।
 

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