UPI चार्ज से किसकी होगी सबसे ज्यादा कमाई, जानिए GPay, PhonePe और बैंक में कौन फायदे में?

Edited By Updated: 16 Sep, 2026 11:48 AM

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UPI पेमेंट में 15 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत यानी 40 बेसिस पॉइंट का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)

नई दिल्लीः UPI पेमेंट में 15 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत यानी 40 बेसिस पॉइंट का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का ऐलान कर दिया है। हालांकि, इस चार्ज का सीधा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।

इस बदलाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि MDR से मिलने वाली रकम का फायदा किसे मिलेगा—UPI ऐप्स, बैंकों या दूसरे भागीदारों को?

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किसे मिलेगा कितना हिस्सा?

  • नए राजस्व-बंटवारे के फॉर्मूले के अनुसार, MDR से मिलने वाली कुल रकम का 40 प्रतिशत हिस्सा ग्राहक के बैंक (Issuing Bank) को मिलेगा। यह वह बैंक है, जिसमें UPI से भुगतान करने वाले व्यक्ति का खाता है।
  • इसके बाद 30 प्रतिशत हिस्सा Acquiring Bank को मिलेगा। यह वह बैंक होता है, जो भुगतान प्राप्त करने वाले मर्चेंट के खाते को संभालता है।
  • इस तरह दोनों बैंकों को मिलाकर MDR की कुल रकम का 70 प्रतिशत हिस्सा बैंकिंग सिस्टम में जाएगा।

PhonePe और Google Pay को कितना मिलेगा?

UPI ऐप्स यानी थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स (TPAP) को MDR की कुल रकम का 20 प्रतिशत हिस्सा मिलने का प्रावधान बताया गया है। वहीं, इन ऐप्स को बैकएंड सपोर्ट देने वाले Sponsor Banks को 10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।

इसे ₹10,000 के ट्रांजेक्शन से समझें। 0.40 प्रतिशत MDR के हिसाब से ₹40 का चार्ज बनेगा। इसका बंटवारा इस तरह होगा:

  • ग्राहक के बैंक को ₹16 यानी 40 प्रतिशत
  • दुकानदार के बैंक को ₹12 यानी 30 प्रतिशत
  • PhonePe या Google Pay जैसे UPI ऐप को ₹8 यानी 20 प्रतिशत
  • Sponsor Bank को ₹4 यानी 10 प्रतिशत

ग्राहकों से सीधे नहीं वसूला जाएगा चार्ज

MDR का भुगतान मर्चेंट की ओर से किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बैंकों को निर्देश दिया गया है कि इस शुल्क को ग्राहकों से अलग से वसूल न किया जाए। UPI ऐप्स को भी इस आधार पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।

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जरूरी सेवाओं और कैपिटल मार्केट के लिए अलग दर

रोजमर्रा की जरूरी सेवाओं से जुड़े कुछ भुगतान, जैसे पेट्रोल, ट्रेन टिकट, मोबाइल रीचार्ज और बीमा प्रीमियम के लिए ₹5 का फ्लैट चार्ज प्रस्तावित है। वहीं, कैपिटल मार्केट से जुड़े लेन-देन पर MDR की दर 0.02 प्रतिशत रखी गई है।

UPI पर MDR क्यों लगाया जा रहा है?

UPI इकोसिस्टम लंबे समय से जीरो-MDR मॉडल पर काम करता रहा है। नए शुल्क से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और देश के छोटे शहरों तक डिजिटल भुगतान नेटवर्क के विस्तार में किए जाने की बात कही जा रही है।

इस बदलाव से UPI इकोसिस्टम में बैंकों, पेमेंट ऐप्स और अन्य भागीदारों के लिए राजस्व का नया स्रोत बन सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर मर्चेंट्स की लागत और डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर किस तरह पड़ेगा, यह नियम लागू होने के बाद स्पष्ट होगा।

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