पंजाब व हरियाणा के ब्लड बैंकों में मोटी रकम लेकर बिक रहा खून!

Edited By Ajay Chandigarh,Updated: 03 Aug, 2022 10:09 PM

chief justice also raised questions on police investigation

पंजाब व हरियाणा में ब्लड बैंकों में हो रही धांधलियों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए पंजाब के ड्रग्स व फूड कंट्रोल विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर और पंजाब के डी.जी.पी. को जालंधर के एक निजी अस्पताल में चल रहे ब्लड बैंक के खिलाफ...

चंडीगढ़,(रमेश हांडा): पंजाब व हरियाणा में ब्लड बैंकों में हो रही धांधलियों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए पंजाब के ड्रग्स व फूड कंट्रोल विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर और पंजाब के डी.जी.पी. को जालंधर के एक निजी अस्पताल में चल रहे ब्लड बैंक के खिलाफ दर्ज हुई एफ.आई.आर. और लाइसैंस रद्द होने और एफ.आई.आर. दर्ज होने के बाद पुलिस की ओर से आरोपी को दी गई क्लीनचिट और आरोपियों को बचने की कोशिशों व एक ही नाम से हरियाणा, पंजाब व अन्य राज्यों में चल रहे ब्लड बैंकों की विस्तृत रिपोर्ट बनाकर चीफ सैक्रेटरी (हैल्थ) व होम के जरिए एफिडेविट सहित जमा करवाने को कहा था। हाईकोर्ट की ओर से कई अवसरों पर पंजाब व हरियाणा सरकार को आदेश जारी कर ब्लड बैंकों की जांच कर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा जाता रहा है। 

 


बुधवार को चीफ जस्टिस रवि शंकर झा पर आधारित बैंच में मामले की सुनवाई हुई। जहां प्रतिवादियों की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट को देखकर कोर्ट ने पेश हुए अधिवक्ताओं को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि जो रिपोर्ट पेश की गई है, वह कोर्ट की ओर से जारी किए आदेशों को समक्ष रखकर बनाई गई है, लेकिन कोर्ट को आदेशों का जवाब नहीं बल्कि ब्लड बैंकों के नाम पर हो रही धांधली और इस मामले में आरोपी बनाए गए अस्पताल व व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और इस गोरख-धंधे के खात्मे के लिए किए गए कार्यों का ब्यौरा चाहिए। कोर्ट ने कहा कि एक तरफ खून के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ हो रहा है और दूसरी तरफ पुलिस आरोपियों को बचाने में जुटी है। 

 


कोर्ट ने पंजाब के ड्रग्स व फूड कंट्रोल विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर व पंजाब के पुलिस प्रमुख को इस मामले में जांच कर चीफ सैक्रेटरी हैल्थ व होम के एफिडेविट सहित रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने पंजाब व हरियाणा से संबंधित प्रतिवादियों को अगली सुनवाई के दौरान स्पष्ट और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।  

 


सुनवाई के दौरान रेलवे से रिटायर हुए सिविल इंजीनियर सतीश चंद्र गुप्ता ने कोर्ट में एप्लीकेशन दाखिल कर इस मामले में कोर्ट की मदद करने की पेशकश की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि वह रेलवे के करोड़ों के प्रोजैक्ट पर काम कर चुके हैं और उनके पास एक ऐसी डिजिटल योजना है, जिसके तहत सभी ब्लड बैंकों को रजिस्टर्ड कर, उनका डाटा व डोनर की पूरी जानकारी ली जा सकती है। कितना रक्त आया और कितना बाहर गया और किस मरीज के लिए दिया गया। सारा डाटा रखा जा सकेगा और हर दिन रिकॉर्ड की जांच भी की जा सकेगी। 

 


इससे पहले कोर्ट के आदेशों पर ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर जालंधर की ओर से कोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया था कि गुलाब देवी अस्पताल में चल रहे ब्लड बैंक में खामियां पाए जाने के बाद ब्लड बैंक का लाइसैंस रद्द कर दिया गया था और उसके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की गई थी। जिसमें धोखाधड़ी, साजिश और दस्तावेजों से छेड़छाड़ की धाराएं लगाई गई थी। 

 


पुलिस ने बाद में मामले में ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट जालंधर की कोर्ट में एफ.आई.आर. की कैंसलेशन रिपोर्ट पेश कर दी थी। जिसे कोर्ट ने लेने से इनकार करते हुए थाना डिवीजन नंबर-2 जालंधर को आदेश दिए थे कि मामले की निष्पक्ष जांच करें। हद तो तब हो गई जब पुलिस ने एक बार फिर कैंसलेशन रिपोर्ट कोर्ट को भेज दी।

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