भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की पहली बैठक में ही असंतुष्ट पार्षदों का फूटा गुस्सा

Edited By pooja verma,Updated: 27 May, 2020 12:21 PM

disgruntled councilors  anger erupted in first meeting of bjp

चंडीगढ़ भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी में गुटबाजी अपने चरम पर हैं।

चंडीगढ़ (राय): चंडीगढ़ भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी में गुटबाजी अपने चरम पर हैं। भले ही इस वर्ष जनवरी में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद दावे किए जा रहे थे कि अब से पार्टी में सिर्फ एक ही गुट रहेगा, उन दावों कौ मंगलवार को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के साथ हुई पहली ही बैठक में कलई खुल गई। 

 

वर्तमान स्थानीय संगठन से असूुंष्ट पार्षदों गुस्सा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के समक्ष गुस्सा फूट पड़ा। कम से कम 6 पार्षदों ने अपने स्थानीय संगठन के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की । बताया जाता है कि बैठक में तमाम आरोपों के बीच अतीत में हुए विवाद की घटनाओं के गड़े-मुर्दे तक उखड़े गए।

 

हाईकमान से राष्ट्रीय संगठन महामंत्री कौ स्थानीय संगठन के नेताओं से लेकर पार्षदों के साथ पहली बैठक थी लेकिन उनके लिए पहला ही बैठक खट्टे अनुभव वाली रही। अब देखने वाली बात यह है कि हाईकमान में बह क्या रिपोर्ट देते हैं और भविष्य में इसका क्या प्रभाव पड़ता है। कर्फ्यू और लॉक डाऊन के बाद पार्टी की यह हाईकमान के किसी नेता के साथ पहली बैठक थी। बैठक से लंबे समय से नाराजगी दबाए बैठे असंतुष्ट पार्षदों को नाराजगी जताए जाने का खुला मंच मिल गया।
 
 

प्रवासी मजदूरों को घर भेजने पर हुई राजनीति
मार्च में स्थानीय कार्यकारिणी के गठन और इसमें जिन को जगह दी गई थी उसे लेकर ही कार्यकर्ताओं और पार्षदों के बीच फूट पड़ गई थी। बैठक में कार्यकारिणी पर सवाल किए गए। आरोप लगाए गए कि कार्यकारिणी में दो वर्ष पहले मेयर चुनाव में बगावत का बिगुल बजाने वाले कार्यकर्ताओं को जगह दिए जाने के साथ कमान सौंप दी गई। इस तरह पिछले चार-पांच वर्षों में मेयर चुनाव में क्रास वोट के खेल को भी उछाला गया। बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के समक्ष इसमें एक असंतुष्ट धड़ा पूर्वांचल से संबंधित था। 

 

लॉक डाऊन पीरियड के दौरान श्रमिक एसप्रैस में प्रवासी मजदूरों को यू.पी., बिहार भेजे जाने वाली पार्टी की टीम में भी पूर्वांचल के नेताओं ने बैठक में उनकी अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए। बैठक में यहां तक कहा गया कि एक प्रवासी मजदूरों को भेजने की जिम्मेदारों  उन नेताओं को सौंप दी गई, जिनकी पूर्वांचल पर कोई पकड़ नहीं है या फिर वे कुछ महीने पहले ही विरोधी दल का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हुए।

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