हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे गणित विषय में मिले फिसड्डी

Edited By Ajay Chandigarh, Updated: 21 Jun, 2022 09:29 PM

girls get better than boys in studies

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे गणित विषय में फिसड्डी साबित हुए हैं। तीसरी से लेकर 10वीं कक्षा तक के बच्चे गणित के सवालों का जवाब देने में कमजोर हैं। तीसरी क्लास में पढऩे वाले बच्चों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब मिली है। तीसरी कक्षा के...

चंडीगढ़,(अर्चना सेठी): हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे गणित विषय में फिसड्डी साबित हुए हैं। तीसरी से लेकर 10वीं कक्षा तक के बच्चे गणित के सवालों का जवाब देने में कमजोर हैं। तीसरी क्लास में पढऩे वाले बच्चों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब मिली है। तीसरी कक्षा के बच्चों के लिए परीक्षा में पूछे गए सवालों का जवाब देना तो मुश्किल है ही, उनके लिए परीक्षा पत्र में लिखे सवालों को समझना भी आसान नहीं है। नैशनल असैसमैंट सर्वे 2021 की रिपोर्ट की मानें तो तीसरी, 5वीं, 8वीं और 10वीं कक्षा में पढऩे वाले आधे से ज्यादा बच्चों को पाठ्यक्रम की बुनियादी जानकारी भी नहीं है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि सैंटर स्कूलों की 10वीं कक्षा में पढऩे वाले बच्चों ने अंग्रेजी विषय की पढ़ाई में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को पीछे छोड़ दिया है। निजी स्कूलों के बच्चे भी सैंटर स्कूल के बच्चों के समान अंग्रेजी विषय की जानकारी रखते हैं लेकिन सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों का अंग्रेजी विषय में भी बुरा हाल है। रिपोर्ट कहती है कि शहर के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे पढ़ाई में गांवों के सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों से अच्छे हैं।
 

 

10वीं के बच्चों की अंग्रेजी अच्छी 
रिपोर्ट की मानें तो हरियाणा के स्कूलों में 10वीं कक्षा में पढऩे वाले बच्चों का मॉडर्न इंडियन लैंग्वेज (ङ्क्षहदी) के पाठ्यक्रम की पढ़ाई में प्रदर्शन 49 प्रतिशत है। जबकि गणित में 38 प्रतिशत, विज्ञान विषय में 40 प्रतिशत, समाज शास्त्र विषय में 44 प्रतिशत जबकि अंग्रेजी में 53 प्रतिशत प्रदर्शन है। अगर विषयों में परफॉरमैंस की समीक्षा की जाए तो 10वीं के बच्चे बाकी विषयों के मुकाबले अंग्रेजी की पढ़ाई में बेहतर है। हरियाणा के स्कूलों में 10वीं कक्षा में पढऩे वाली लड़कियों ने पढ़ाई में लड़कों को पीछे छोड़ रखा है। अगर ङ्क्षहदी में 50 प्रतिशत लड़कियों की परफॉरमैंस अच्छी है तो वहां लड़के 47 प्रतिशत पर हैं। गणित विषय में लड़की और लड़कों की स्थिति एक जैसी है। दोनों 38 प्रतिशत पर हैं। विज्ञान में लड़कियां 41 प्रतिशत जबकि लड़के 39 प्रतिशत पर हैं। समाज शास्त्र विषय में लड़कियां 45 प्रतिशत जबकि लड़के 42 प्रतिशत पर हैं। अंग्रेजी में लड़कियां 55 प्रतिशत जबकि लड़के 51 प्रतिशत पर हैं। उधर, अम्बाला जिले में 10वीं के 36 प्रतिशत बच्चे ङ्क्षहदी में, 24 प्रतिशत गणित में, 61 प्रतिशत विज्ञान में, समाज शास्त्र में 52 प्रतिशत और अंग्रेजी में 12 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनकी विषयों में बहुत ही खस्ता हालत है। इन बच्चों को न स्कूल पाठ्यक्रम की जानकारी है और विषय की बुनियादी जानकारी भी नहीं है। 
 

 

8वीं के बच्चे भाषा विषय में मिले अच्छे
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 8वीं कक्षा में पढऩे वाले बच्चे भाषा विषयों में दूसरे विषयों से बेहतर है। प्रदेश में भाषा के विषय में बच्चों का प्रदर्शन 62 प्रतिशत, गणित में 42 प्रतिशत, विज्ञान में 45 प्रतिशत, समाज शास्त्र में 43 प्रतिशत आंका गया है। हालांकि 8वीं के बच्चों की स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों की पढ़ाई के मुकाबले अच्छी पाई गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भाषा के विषयों में बच्चों का प्रदर्शन 53 प्रतिशत, गणित में 36 प्रतिशत, विज्ञान में 39 प्रतिशत, समाज शास्त्र में 39 प्रतिशत आंका गया है। आठवीं क्लास में भी लड़कियों ने लड़कों के मुकाबले पढ़ाई में बाजी मारी है। भाषा विषयों में लड़कियां 65 प्रतिशत तो लड़के 59 प्रतिशत प्रदर्शन, गणित में लड़कियों और लड़कों का ज्ञान बराबर हैं। दोनों का प्रदर्शन 42 प्रतिशत है। विज्ञान में लड़कियां 45 प्रतिशत तो लड़कों की परफॉरमैंस 44 प्रतिशत है। समाज शास्त्र विषय में लड़कियां 44 प्रतिशत तो लड़कों का 42 प्रतिशत प्रदर्शन है। अम्बाला के स्कूलों में पढऩे वाले 12 प्रतिशत बच्चों को भाषा में, 24 प्रतिशत गणित में, 32 प्रतिशत विज्ञान में, 35 प्रतिशत समाज शास्त्र में विषय की बुनियादी जानकारी भी नहीं है।
 

 

5वीं में प्रदेश व देश के बच्चों की एक सी परफॉरमैंस 
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 5वीं कक्षा में पढऩे वाले 56 प्रतिशत बच्चों की भाषा विषय में, गणित में 44 प्रतिशत, इनवायरनमैंटल साइंस में 48 प्रतिशत परफॉरमैंस है। प्रदेश के 5वीं के बच्चों का स्तर देश के स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के समान है। रिपोर्ट कहती है कि देश के 55 प्रतिशत बच्चों की भाषा विषय में, गणित में 44 प्रतिशत, इनवायरनमैंटल साइंस में 48 प्रतिशत परफॉरमैंस ही है। अम्बाला जिले में 5वीं के 17 प्रतिशत बच्चे भाषा विषय, गणित में 39 प्रतिशत बच्चे, इनवायरनमैंटल साइंस में 36 प्रतिशत बच्चों को विषय का बुनियादी ज्ञान भी नहीं है। पांचवीं कक्षा में भी लड़कियों ने पढ़ाई में लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। भाषा विषय में लड़कियों की 55 प्रतिशत जबकि लड़कों की 50 फीसदी, इनवायरनमैंटल साइंस में लड़कियों का प्रदर्शन 50 फीसदी तो लड़के 47 प्रतिशत पर हैं। गणित में लड़कियों व लड़कों की एक समान परफॉरमैंस है। दोनों 44 प्रतिशत पर हैं।
 

 

सवाल समझाने पर भी नहीं दे सके तीसरी के बच्चे जवाब
तीसरी कक्षा में पढऩे वाले प्रदेश के बच्चों का भाषा विषय में प्रदर्शन 58 प्रतिशत, गणित में 54 प्रतिशत, इनवायरनमैंटल साइंस में 54 प्रतिशत है। इस कक्षा में भी लड़कियों ने पढ़ाई में लड़कों को पछाड़ रखा है। भाषा विषय में लड़कियों का प्रदर्शन 61 प्रतिशत, लड़कों का 57 प्रतिशत है। गणित में लड़कियां 55 प्रतिशत तो लड़कों की परफॉरमैंस 54 प्रतिशत है। इनवायरनमैंटल साइंस में लड़कियों का प्रदर्शन 55 प्रतिशत तो लड़कों का 52 प्रतिशत है। सूत्र कहते हैं कि परीक्षा के दौरान शिक्षकों के सवाल समझाए जाने के बाद भी तीसरी कक्षा के बच्चे सवालों के जवाब नहीं दे सके। 

 


नो डिटैंशन पॉलिसी बच्चों को पढ़ाई से कर रही दूर
हरियाणा स्कूल लैक्चरार एसोसिएशन (हसला) के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंधु का कहना है स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे पढ़ाई में कमजोर इस वजह से रह गए हैं क्योंकि सरकार ने पहले 5वीं फिर 8वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षाएं समाप्त कर दी। बच्चे बोर्ड की परीक्षाओं का खौफ न रहने की वजह से गंभीरता से पढ़ाई नहीं करते। पढ़ाई के प्रति लापरवाह होने की वजह से बच्चों का सामान्य अध्ययन भी कमजोर हो गया है। सरकार की नो डिटैंशन पॉलिसी यानी रुकावट के बगैर करवाई जाने वाली पढ़ाई बच्चों को लिखने से ही नहीं पढऩे से भी दूर कर रही है।


 

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