जालंधर डिवैल्पमैंट अथॉरिटी ने प्लॉटों को नहीं किया रैगुलर, कंज्यूमर कमीशन ने लगाया जुर्माना

Edited By Ajay Chandigarh,Updated: 04 Aug, 2022 09:36 PM

state commission asked to reconsider and pass order afresh

जालंधर कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रेसल कमीशन ने जालंधर डिवैल्पमैंट अथॉरिटी द्वारा सरकार की अवैध कालोनियों को रैगुलर करने की अधिसूचना के तहत अवैध प्लॉट्स को रैगुलर नहीं करने व ली गई फीस नहीं लौटाने की शिकायतों पर अथॉरिटी को 45 दिन में प्लाट रैगुलर करने...

चंडीगढ़,(हांडा): जालंधर कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रेसल कमीशन ने जालंधर डिवैल्पमैंट अथॉरिटी द्वारा सरकार की अवैध कालोनियों को रैगुलर करने की अधिसूचना के तहत अवैध प्लॉट्स को रैगुलर नहीं करने व ली गई फीस नहीं लौटाने की शिकायतों पर अथॉरिटी को 45 दिन में प्लाट रैगुलर करने की प्रक्रिया पूरी करने के साथ 30000 रुपए हर्जाना व 5000 रुपए लिटिगेशन चार्ज के रूप में शिकायतकर्ताओं को देने के आदेश पारित किए थे। इन आदेशों के खिलाफ दायर अपील को स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने स्वीकार करते हुए डिस्ट्रिक्ट कमीशन को दोनों पक्षों को सुनकर पुन: आदेश देने को कहा है। 

 


मोहन सिंह, तेजिंद्र सिंह व अन्य ने टिवाणा एन्क्लेव कोटकलां जालंधर में प्लाट खरीदे थे, जो कि अवैध कालोनी में थे। पंजाब सरकार ने वर्ष 2016 में अधिसूचना जारी कर अवैध कालोनियों को एकमुश्त फीस लेकर रैगुलर किए जाने को कहा था। शिकायतकर्ताओं ने निर्धारित समय के भीतर प्लाट रैगुलर करने के लिए आवेदन किया और अथॉरिटी में फीस भी जमा की थी लेकिन उनके प्लाट रैगुलर नहीं किए गए। शिकायतकर्ताओं ने प्लाट रैगुलराइज करने के लिए दी गई फीस लौटाने को कहा पर अथॉरिटी ने कोई जवाब नहीं दिया। इस रवैये के खिलाफ सभी ने कंज्यूमर कमीशन में शिकायत कर दी, जिस पर सुनवाई करते हुए कमीशन ने जालंधर डिवैल्पमैंट अथॉरिटी को सेवाओं में कोताही का दोषी मानते हुए शिकायतकर्ताओं के प्लाट 45 दिन के भीतर रैगुलर किए जाने के आदेश जारी करते हुए अथॉरिटी को 30000 रुपए हर्जाना देने व 5000 रुपए लिटिगेशन चार्ज के रूप में देने के आदेश दिए। 

 


उक्त आदेशों को जालंधर डिवैल्पमैंट अथॉरिटी ने स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रिडे्रसल कमीशन चंडीगढ़ में चुनौती देते हुए अपील दाखिल की। अपील में कहा गया कि शिकायतकर्ताओं ने प्लाट रैगुलराइज करने के लिए आवेदन किया था लेकिन उसमें दस्तावेज पूरे नहीं थे, जिसके चलते प्लाट रैगुलर नहीं हो सके। अपील में कहा गया कि ली गई फीस नहीं लौटाना सेवाओं में कोताही की श्रेणी में नहीं आंका जा सकता, इसलिए डिस्ट्रिक्ट कमीशन के आदेशों को रद्द किया जाए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। स्टेट कमीशन की प्रमुख जस्टिस दया चौधरी, राजिंद्र कुमार गोयल व उर्वशी गुलाटी पर आधारित बैंच ने जालंधर डिवैल्पमैंट अथॉरिटी की अपील स्वीकार करते हुए डिस्ट्रिक्ट कमीशन को आदेश दिए हैं कि दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने व दस्तावेज दिखाने का मौका दिया जाए और तमाम पहलुओं पर विचार कर नए सिरे से आदेश जारी किए जाएं। 

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