एच.सी.एस., डैंटल सर्जन भर्ती घोटाले की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में हो: सुर्जेवाला

Edited By Ajay Chandigarh,Updated: 04 Aug, 2022 06:53 PM

vigilance s emphasis on saving the accused from punishment

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद, रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने प्रदेश के बहुचर्चित एच.सी.एस. व डैंटल सर्जन भर्ती घोटाले की जांच पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पदेन मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में कराए जाने की मांग की है। सुर्जेवाला ने...

चंडीगढ़,(बंसल): कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद, रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने प्रदेश के बहुचर्चित एच.सी.एस. व डैंटल सर्जन भर्ती घोटाले की जांच पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पदेन मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में कराए जाने की मांग की है। सुर्जेवाला ने मामले की जांच के नाम पर पाखंड कर रही विजीलैंस पर घोटाले में शामिल बड़े मगरमच्छों को बचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले में जितनी बड़ी मछलियां शामिल थीं, विजीलैंस जांच के नाम पर खट्टर सरकार ने उन सभी को बचा लिया है।

 


सुर्जेवाला ने कहा कि इस घोटाले में जितने बड़े-बड़े नाम निकल कर आ रहे थे, उनकी जांच करना विजीलैंस के बूते से बाहर की बात है। यही कारण है कि मुख्य विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस पार्टी की शुरू से ही यह मांग रही है कि इस घोटाले की जांच विजिलेंस से लेकर उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश से करवाई जाए। अभी तक की जांच के आधार पर यह निष्कर्ष साफ है कि विजीलैंस केवल अनिल नागर जैसे छोटे स्तर के अधिकारी को मोहरा बनाकर एच.पी.एस.सी. के सदस्यों और सरकार से जुड़े लोगों को बचा रही है। खट्टर सरकार ने तमाम नैतिकताओं को ताक पर रखते हुए विजीलैंस जांच के नाम पर सभी घोटाले बाजों को क्लीन चिट देकर मुक्त कर दिया।
 

 

चेयरमैन आलोक वर्मा को जांच में क्यों नहीं किया शामिल?
उन्होंने कहा कि इस भर्ती घोटाले की प्रारंभिक जांच में एच.पी.एस.सी. के चेयरमैन आलोक वर्मा की संलिप्तता के प्रारंभिक सबूत सामने आने के बावजूद भी आलोक वर्मा को विजीलैंस ने जांच में शामिल नहीं किया। सभी लोग जानते हैं कि एच.पी.एस.सी. के चेयरमैन आलोक वर्मा सी.एम.ओ. से एच.पी.एस.सी. में आए हैं तथा उनकी गिनती मुख्यमंत्री खट्टर के बेहद करीबी लोगों में होती आई है। उन्होंने पूछा कि कहीं खट्टर साहब को यह डर तो नहीं सता रहा कि यदि आलोक वर्मा को जांच के दायरे में लाया गया तो इस घोटाले की जांच की आंच उनके सी.एम.ओ. तक भी पहुंच सकती है? उन्होंने कहा कि खट्टर सरकार की विजीलैंस ने इतने बड़े घोटाले को 15 एच.सी.एस. और 13 डेंटल सर्जन की ओ.एम.आर. तक सीमित कर दिया। उन्होंने पूछा कि जब खुलेआम ओ.एम.आर. सीट भरी जा रही थी तो क्या विजीलैंस चीफ ये शपथ पत्र दे सकते हैं कि इसके अलावा किसी और ओ.एम.आर. सीट में गड़बड़ नहीं है?

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