Sawan third monday: इस विधि से करें शिव जी को प्रसन्न

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 01 Aug, 2022 09:58 AM

3rd monday of shravan

आज सावन का तीसरा सोमवार है। सावन मास में रुद्राभिषेक का खास महत्व है। सावन के माह में सर्वाधिक वर्षा होती है जो शिव के गर्म शरीर को ठंडक देती है, साथ ही शिव के तीन नेत्र हैं जिनमें दाहिना सूर्य,

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Third Sawan somwar: आज सावन का तीसरा सोमवार है। सावन मास में रुद्राभिषेक का खास महत्व है। सावन माह में सर्वाधिक वर्षा होती है जो शिव के गर्म शरीर को ठंडक देती है, साथ ही शिव के तीन नेत्र हैं जिनमें दाहिना सूर्य, बायां चंद्र एवं मध्य अग्नि है। भगवान शिव कल्याणकारी देवता हैं। उनकी पूजा से सारे मनोरथ पूरे होते हैं। भारतीय वैदिक शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की पूजा एक नहीं अनेक तरह से करने का विधान है और उनके विभिन्न लाभ भी यजुर्वेद में बताए गए हैं। विधि से रुद्राभिषेक करना अत्यंत लाभकारी है परंतु जो लोग विधि-विधान से शिव का अभिषेक नहीं कर सकते वे ऊं नम: शिवाय का जाप करते हुए भी शिव अभिषेक का पूरा लाभ ले सकते हैं।

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अभिषेक के भी कई प्रकार होते हैं। रुद्राभिषेक भगवान शिव को खुश करने का सबसे सरल व प्रभावी तरीका है। ऋग्वेद यजुर्वेद-सामवेद में रुद्राभिषेक की महिमा निहित है। शिव और रुद्र एक ही हैं। शिव को ही रुद्र की संज्ञा दी गई है। वेद कहते हैं कि हमारे दुखों का कारण हमारे पाप हैं। रुद्राभिषेक से वे सारे पाप धुल जाते हैं और शिव का आशीर्वाद मिल जाता है। भगवान शिव का आशीष पाने के लिए ही रुद्राभिषेक किया जाता है। 

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रुद्राभिषेक पूजन के लाभ 
हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त को बताया गया है। किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिए नीचे दी गई पूजन सामग्री और विधि से रुद्राभिषेक किया जाता है।

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जल से रुद्राभिषेक करने पर वर्षा का आनंद प्राप्त होता है।

कुशा से रुद्राभिषेक करने से असाध्य रोगों पर विजय प्राप्त होती है।

दही से रुद्राभिषेक करने पर वाहन का सुख प्राप्त होता है।

गन्ने के रस, शहद और घी से रुद्राभिषेक करने पर धन लाभ की प्राप्ति होती है।

तीर्थों के जल से रुद्राभिषेक करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इत्र वाले जल से रुद्राभिषेक करने पर रोगों से छुटकारा मिलता है।

दूध से रुद्राभिषेक करने वाले को संतान सुख मिलता है।

गाय के दूध से जो व्यक्ति रुद्राभिषेक करता है, उसकी संतान दीर्घायु होती है।

बर्फ के जल या गंगा जल से रुद्राभिषेक करने पर ज्वर शांत होता है।

सहस्त्रनाम जाप के साथ घी की धारा का रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है।

दूध की धारा से रुद्राभिषेक करने पर प्रमेह रोग में शांति मिलती है। 

शक्कर मिश्रित दूध से रुद्राभिषेक करने पर शत्रु पराजित होते हैं।

गाय का दूध और घी मिलाकर रुद्राभिषेक करने से आरोग्यता का वरदान मिलता है।

 
शक्कर मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करने पर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

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