यम की दिशा से बच कर रहें, पड़ सकता है आप पर बुरा प्रभाव

Edited By ,Updated: 18 May, 2015 10:27 AM

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किसी घर का द्वार दक्षिण दिशा की ओर हो तो वास्तु में इसे दोष माना जाता है। यम का अर्थ है भक्षण करने वाला। वैज्ञानिक दृष्टि से अगर देखें तो उत्तर से आती चुंबकीय तरंगें लगातार दक्षिण की ओर जा रही हैं।

किसी घर का द्वार दक्षिण दिशा की ओर हो तो वास्तु में इसे दोष माना जाता है। यम का अर्थ है भक्षण करने वाला। वैज्ञानिक दृष्टि से अगर देखें तो उत्तर से आती चुंबकीय तरंगें लगातार दक्षिण की ओर जा रही हैं। यदि किसी भवन में दक्षिण में द्वार हो तो उत्तर से आती हुई इन तरंगों का मार्ग मिलता रहता है। भवन में उन तरंगों का उपयोग नहीं हो पाता। उत्तरी तरंगें जीवन में यश, समृद्धि व स्वास्थ्य आदि देने वाली हैं इसीलिए ऋषियों ने उत्तर को कुबेर की दिशा बताया है। यह सांकेतिक रूप से भी समझने योग्य है कि उत्तर के स्वामी कुबेर हैं और दक्षिण के यम।

प्लाट दक्षिण मुखी हो तो 
यदि आपका प्लाट दक्षिण मुखी है और आप नया मकान बनवा रहे हैं तो आपको दक्षिण दिशा को 9 भागों में विभाजित कर बाईं ओर से तीन भाग छोड़ कर चौथे भाग में अपने द्वारा निश्चित करना चाहिए। ध्यान रखें कि पांचवें भाग का कोई भी अंश द्वार के प्रयोग में न आए क्योंकि इसी भाग के स्वामी यम हैं। इसी पांचवें भाग को पूरी तरह बंद होना चाहिए यानी वहां कोई खिड़की, रोशनदान इत्यादि न हो।
 
दक्षिण का हिस्सा ऊंचा रखें
प्रथम तो यह कि दक्षिण की भूमि का तल उत्तर से ऊंचा है तो उत्तर से आती हुई तरंगें रुकेंगी और इस भवन पर अपना शुभ प्रभाव देंगी। इसके विपरीत स्थिति में यदि दक्षिण का भाग नीचा होगा तो शुभ प्रभाव मिलना मुश्किल होगा क्योंकि वह भवन में रुक न सकेंगी और परिणामस्वरूप समृद्धि, सम्पन्नता, आरोग्य भी स्थायी न रहेंगे।
 
यदि दक्षिणमुखी भवन के सामने खाली मैदान है या फिर काफी दूरी पर मकान है, द्वार के सामने कोई रोक नहीं है तो इसके दुष्परिणाम देखे गए हैं। दक्षिण द्वार का एक अन्य साधारण सरल उपाय यह भी है कि निकलते समय आपको अपना प्रतिबिंब दिखाई पड़ जाए तो इसका दोष जाता रहेगा। अर्थात जब आप अपने द्वार से निकलें तो सामने की ओर ऐसा दर्पण या चमकदार पत्थर की शीट लगी हो जिसमें आपका प्रतिबिंब उत्तर से आता हुआ दिखाई दे।
 
कुबेर यंत्र का पूजन करें
दक्षिण द्वार वाले गृहस्वामी को अक्सर धन की कमी, आय से अधिक व्यय, परिवार में अशांति तथा कर्ज इत्यादि की समस्या हो सकती है। यदि ऐसा है तो कुबेर यंत्र स्थापित कर उसकी विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए। गणपति उपासना अथवा लक्ष्मी-गणेश की उपासना दक्षिण द्वार वाले भू-स्वामियों को उनकी समस्याओं के निवारण हेतु अत्यधिक शुभप्रद है।
 
दक्षिण में ऊंचे वृक्ष लगाएं
दक्षिण-पश्चिम की दिशा की दीवार पर टी.वी. एंटीना या ध्वजा लगाकर इस हिस्से को ऊंचा कर दें ताकि देखने वालों को इस ओर ऊंचाई का एहसास हो। दक्षिण दिशा में यदि ऊंचे वृक्ष हैं और आपके भवन से ऊंचाई से लम्बे हैं तो यह स्थिति स्वयंमेव दक्षिणमुखी भवनों के लिए बहुत शुभप्रद है। 
 
सटीक दक्षिण तय करें
यदि कंपास भवन के ठीक मध्य में रखा जाए और आपके भवन का द्वार ठीक दक्षिण में है। सिर्फ तभी यह चिंता का विषय है, अन्यथा चिंतनीय नहीं है क्योंकि कई दक्षिण मुखी भवन वाले भू-स्वामी खूब सम्पन्न, स्वस्थ और सफल दिखाई देते हैं। इसका कारण यह है कि उनका द्वार ठीक दक्षिण अर्थात यम की दिशा में नहीं था।
 
 —पं. शशिशेखर त्रिपाठी

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