Astrological prediction: राजनीतिक भीतर घात का शिकार हो सकते हैं नीतिश कुमार

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 13 Aug, 2022 09:57 AM

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार जल्द ही राजनीतिक भीतर घात का शिकार हो सकते हैं और उनका 8वीं बार बतौर मुख्यमंत्री कार्यकाल पूर्ण करना भी सितारों की स्थिति के लिहाज से संदिग्ध लग रहा है। नीतिश कुमार ने 10 अगस्त को 2 बजकर 6 मिनट पर

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जालंधर (विशेष) : बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार जल्द ही राजनीतिक भीतर घात का शिकार हो सकते हैं और उनका 8वीं बार बतौर मुख्यमंत्री कार्यकाल पूर्ण करना भी सितारों की स्थिति के लिहाज से संदिग्ध लग रहा है। नीतिश कुमार ने 10 अगस्त को 2 बजकर 6 मिनट पर पटना में शपथ ग्रहण की है। शपथ ग्रहण कुंडली में वृश्चिक लग्न की बनती है और लग्न का स्वामी मंगल छठे भाव में राहु के साथ युति बना रहा है। छठा भाव रोग, ऋण, शत्रु के साथ-साथ विवादों का भाव भी है। लिहाजा नीतिश की तेजस्वी के साथ मिलकर बनाई गई सरकार जल्द ही विभिन्न कारणों के कारण विवादों में आ सकती है। वृश्चिक लग्न में 9वें भाव का स्वामी बाधक होता है और सत्ता का कारक सूर्य शपथ ग्रहण कुंडली में बाधक स्थान पर ही जाकर बैठ गया है और इसके अलावा सूर्य के ऊपर वक्री अवस्था में चल रहे शनि की भी दृष्टि है। यह स्थिति भी सरकार के सामान्य आप्रेशन के लिए सही नहीं है। आने वाले दिनों में नीतिश कुमार की पार्टी के भीतर ही उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और इसके अलावा गुरु, शनि के साथ-साथ बुध के वक्री होने पर उन्हें अपने साथ नए साथियों को जोड़ने में भी परेशानी हो सकती है। 

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नीतिश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना के बख्तियारपुर में हुआ है और उनकी जन्मकुंडली मिथुन लगन की है और नीतिश कुमार इस समय राहु की महादशा से गुजर रहे हैं और राहु की महादशा में केतु का अंतर मई में शुरू हुआ है, यह अगले साल जून तक चलेगा। इस दौरान कई ऐसे बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो नीतिश के लिए राजनीतिक रूप से नुक्सानदायक साबित होंगे। नीतिश कुमार की कुंडली में लग्न का स्वामी बुध आने वाली 10 सितम्बर को वक्री हो जाएगा और यह 2 अक्तूबर तक वक्री अवस्था में रहेगा। बुध नीतिश कुमार की कुंडली में जनता के भाव (चौथा भाव) का भी मालिक है और इसके वक्री होने की स्थिति में नीतिश की छवि जनता में आने वाले दिनों में खराब हो सकती है। 

नीतिश कुमार ज्येष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए हैं और इस नक्षत्र में पैदा हुए जातक राजनीतिक रूप से ऊंचाइयां छूने के बाद ढलान पर भी आना शुरू हो जाते हैं। नीतिश के साथ 2014 में ऐसा हो चुका है और 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी जनता दल यू दो सीटों पर सिमट गई थी। नीतिश की कुंडली में पार्टनरशिप हाऊस के स्वामी गुरु बनते हैं और गुरु नीतिश की कुंडली में अस्त है। इसका मतलब है कि उनके साथ किसी भी पार्टी की ज्यादा लंबे समय तक भागेदारी नहीं चल पाएगी और ऐसे जातक लगातार अपने साथी बदलते रहते हैं। लिहाजा नीतिश के नए साथी तेजस्वी के साथ उनके सफर को लेकर भी सवालिया निशान खड़े होते हैं। नीतिश कुमार को 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्ष के चेहरे के तौर पर पेश किए जाने की तैयारी चल रही है, लेकिन उनकी कुंडली में चल रही महादशा और अंतर्दशा के मुताबिक जून 2023 के बाद उनका राजनीतिक जीवन उठा-पटक भरा रह सकता है।

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