ऐसा विशाल ह्रदय रखते हैं संत,कभी न करें इनका अपमान

Edited By Jyoti,Updated: 23 Jul, 2022 04:28 PM

dharmik katha in hindi

संत दादू दयाल जी भिक्षा मांगने जिस रास्ते से निकलते थे, वहां बीच में एक ऐसा घर पड़ता था जहां रहने वाला व्यक्ति उनकी भरपूर निंदा करता था। कई बार जब वह निंदक नजर नहीं आता

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

संत दादू दयाल जी भिक्षा मांगने जिस रास्ते से निकलते थे, वहां बीच में एक ऐसा घर पड़ता था जहां रहने वाला व्यक्ति उनकी भरपूर निंदा करता था। कई बार जब वह निंदक नजर नहीं आता तब भी संत दादू दयाल जी उसके मकान के सामने कुछ देर प्रतीक्षा करते और उसके बाद ही आगे बढ़ते। कुछ दिन वह निंदक दिखाई नहीं पड़ा तो दयाल जी ने आसपास पूछा। पूछने पर पता लगा कि उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई है। इस बात से दयाल जी अत्यंत दुखी होकर जोर-जोर से रोने लगे।

PunjabKesari Dharmik Katha In Hindi, Dharmik Story In Hindi, Lok katha In hindi, Dharmik Hindi katha, Dant Katha in Hindi, हिंदी धार्मिक कथा, Motivational Concept, Dharm, Punjab Kesari

शिष्य ने पूछा, ‘‘गुरुदेव, आप क्यों रोते हैं?

वह तो आपका निंदक था, वह मर गया तो आपको प्रसन्न होना चाहिए परंतु आप तो रो रहे हैं, ऐसा क्यों?’’

PunjabKesari Dharmik Katha In Hindi, Dharmik Story In Hindi, Lok katha In hindi, Dharmik Hindi katha, Dant Katha in Hindi, हिंदी धार्मिक कथा, Motivational Concept, Dharm, Punjab Kesari

दयाल जी बोले, ‘‘वह मेरी निंदा करके मुझे सदा स्मरण करवाता रहता था कि मैं कोई संत-महात्मा नहीं हूं, मैं कोई ज्ञानी नहीं हूं। वह मुझे स्मरण कराता रहता था कि यह संसार कांटों से भरा है। वह मुझे ज्ञान और त्याग का अहंकार नहीं होने देता था। यह सब उसने मेरे लिए किया वह भी मुफ्त में। वह बड़ा नेक इंसान था, अब उसके जाने पर मेरे मन का मैल कौन धोएगा?’’

1100 रुपए मूल्य की जन्म कुंडली मुफ्त में पाएं। अपनी जन्म तिथि अपने नाम, जन्म के समय और जन्म के स्थान के साथ हमें 96189-89025 पर वाट्स ऐप करें

PunjabKesari kundlitv

इसके कुछ दिन बाद वह व्यक्ति दिव्य शरीर धारण करके दयाल जी के सामने प्रकट हुआ। उससे संत दादू दयाल जी ने पूछा, ‘‘तुम्हारी तो कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी थी?’’

उस व्यक्ति ने कहा, ‘‘आप जैसे परम संत की निंदा करने के पाप से मैं प्रेत योनि में चला गया था और कुछ दिनों से कष्ट पा रहा था परंतु कुछ दिनों के बाद मेरी मृत्यु की घटना सुनते ही आपने मेरा स्मरण किया और प्रभु से मेरे उद्धार की प्रार्थना भी की।’’

‘‘मुझ जैसे निंदक पर भी आप जैसे महात्मा कृपा करते हैं। आप जैसे परम नाम जापक संत के संकल्प से मैं प्रेत योनि से मुक्त होकर दिव्य लोक को जा रहा हूं।’’ 

— अशोक मिश्रा

PunjabKesari Dharmik Katha In Hindi, Dharmik Story In Hindi, Lok katha In hindi, Dharmik Hindi katha, Dant Katha in Hindi, हिंदी धार्मिक कथा, Motivational Concept, Dharm, Punjab Kesari

Related Story

Trending Topics

West Indies

137/10

26.0

India

225/3

36.0

India win by 119 runs (DLS Method)

RR 5.27
img title img title

Everyday news at your fingertips

Try the premium service

Subscribe Now!