गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी पर स्नान, दान कर परेशानियों से कैसे मुक्त हों

Edited By Niyati Bhandari, Updated: 03 Jun, 2022 08:56 AM

ganga dussehra nirjala ekadashi

महार्षि भृगु जी ने अपने पावन ग्रंथ श्री भृगु संहिता के माध्यम से एक वृतांत द्वारा गंगा दशहरा एवं निर्जला एकादशी पर गंगा स्नान, दान, भंडारा, पूर्वजों की मुक्ति, शुभ कर्म करके परेशानियों से मुक्त होने का रास्ता बताया है।

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Ganga dussehra Nirjala Ekadashi 2022: महार्षि भृगु जी ने अपने पावन ग्रंथ श्री भृगु संहिता के माध्यम से एक वृतांत द्वारा गंगा दशहरा एवं निर्जला एकादशी पर गंगा स्नान, दान, भंडारा, पूर्वजों की मुक्ति, शुभ कर्म करके परेशानियों से मुक्त होने का रास्ता बताया है। भगवान श्री राम जी के ही इक्ष्वाकु वंश में पैदा हुए अयोध्या के राजा दिलीप के पुत्र भागीरथ को कपिल मुनि के श्राप द्वारा भस्म हुए अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिये घोर तपस्या के प्रभाव से मां गंगा को धरती पर लाने का श्रेय जाता है। गंगा का बैकुंठ लोक से धरती लोक के लिए अवतरण जब हुआ और गंगा के वेग को नियंत्रित करने के लिए शिव जी ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया तो उस दिन को गंगा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है और जिस दिन शिव जी की जटाओं से निकल कर धरती लोक पर अवतरण हुआ, उस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।

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Ganga dussehra Shubh Muhurat 2022: गंगा दशहरा हर वर्ष ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्यौहार 9 जून 2022 को मनाया जायेगा। दशमी तिथि का आरम्भ 9 जून 2022 को प्रातः 8 बजकर 23 मिनट पर होगा व समापन 10 जून 2022 को प्रातः 7 बजकर 27 मिनट पर होगा। दशमी तिथि का एक अर्थ यह भी होता है जो दसों दिशाओं में फैला हो। माना जाता है कि दशमी तिथि के दिन जो भी शुभ कर्म किया जाता है, उसके प्रभाव से कर्म करने वाले को जो आर्शीवाद प्राप्त होते हैं वह व्यक्ति किसी भी दिशा में चला जाए वहीं पर ही सफल होगा और हर परिस्थितियों के अनुकूल हो जायेगा।

Nirjala ekadashi shubh muhurat 2022: गंगा दशहरे से अगले ही दिन निर्जला एकादशी का त्यौहार भी मनाया जाता है। यह त्यौहार 10 जून 2022 को मनाया जायेगा। एकादशी तिथि का आरम्भ 10 जून 2022 को प्रातः 7 बजकर 27 मिनट पर होगा व समापन 11 जून 2022 को प्रातः 5 बजकर 47 मिनट पर होगा।

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Ganga dussehra Nirjala Ekadashi upay: इन दोनों दिनों में पवित्र नदियों या तालाबों में अवश्य स्नान करना चाहिए। अगर पवित्र स्थान पर जाना न हो सके तो गंगा जल को कुछ मात्रा में घर के टब में ही डालकर स्नान अवश्य करना चाहिए। महार्षि भृगु जी बताते हैं कि हरिद्वार में हर की पौड़ी पर एक ब्रह्म कुंड है। यह वही स्थान है, जहां पर किसी समय समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए अमृत कलश की कुछ बूंदे इसी ब्रह्म कुंड पर गिरी थी। इसी  ब्रह्म कुंड के पास श्रीहरि विष्णु जी के चरण चिन्ह हैं। जिस कारण इस स्थान को हर की पौड़ी के रूप में जाना जाता है। गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी पर बहुत सारी देवआत्माएं किसी न किसी रूप में इन स्थानों पर यात्रा करती हैं। उस दौरान जो भी धूल उड़ती है उसमें उन देवआत्माओं की चरण धूली भी होती है। अगर यह धूल आपके कपड़ों पर भी पड़ती है तो उससे आपके भाग्य में परिवर्तन हो जाता है।

कहा गया है कि विशेष दिन और स्थान पर किया गया दान व शुभ कर्म बहुगुणा प्रभाव बनाते हैं। इस दिन जो भी व्यक्ति ठंडे दूध, शरबत, भोजन, भंडारे, साधुओं को दान-दक्षिणा इत्यादि की सेवा करता है तो मानो वह अपना यह लोक और परलोक दोनों ही संवार रहा है। जो झूठे बर्तनों को साफ करने की सेवा करता है तो मानो वह अपने द्वारा किये गये पापों को स्वयं ही धो रहा है। ऐसा प्रभाव इस दिन किये गये शुभ कर्मों का होता है और इस विशेष दिन किये गये शुभ कर्माें से न जाने कितने यज्ञों के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है।

इन दोनों शुभ दिनों पर हो सके तो हरिद्वार यात्रा जरूर करनी चाहिए नहीं तो किसी भी पवित्र नदी तालाब इत्यादि में स्नान करके यथाशक्ति भंडारा, शीतल जल की सेवा, साधुओं को दान-दक्षिणा, वस्त्र, अन्न, फल, दूध इत्यादि की सेवा करें। शुभ कर्म अवश्य करने चाहिए।

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Sanjay Dara Singh
AstroGem Scientist
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM)

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