इस दिन होगा वेदों की जननी मां गायत्री का पूजन, मिलेगा लाभ ही लाभ

Edited By Jyoti, Updated: 10 Jun, 2022 04:10 PM

gayatri jayanti 2022

जैसे कि हिंदू धर्म में मां गायत्री को वेदों की जननी कहा गया है तो ऐसे में इन्हें वेद माता व जगत माता के नाम से भी जाना जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गायत्री जयंती

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जैसे कि हिंदू धर्म में मां गायत्री को वेदों की जननी कहा गया है तो ऐसे में इन्हें वेद माता व जगत माता के नाम से भी जाना जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गायत्री जयंती का पावन पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन वेदों की जननी वेदमाता गायत्री की उत्पति हुी थी और इस दिन देवी गायत्री की पूजा व उनका व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। साथ ही मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। तो आइए आज बताते हैं आपको गायत्री जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, व कथा के बारे में पूरी जानकारी। 

गायत्री जयंती की तिथि व शुभ मुहूर्त-
एकादशी तिथि का आरंभ 10 जून को सुबह 07 बजकर 25 मिनट पर होगा और एकादशी तिथि का समापन 11 जून को प्रात-काल 05 बजकर 45 मिनट पर होगा। उदया तिथि के हिसाब से गायत्री जयंती 11 जून, दिन शनिवार को है।

इसके अलावा आपको बता दें कि गायत्री जयंती पर देवी गायत्री का विधि-विधान से पूजन करने का विशेष महत्व माना गया है। सबसे पहले गायत्री जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद अपने शरीर को पंचकर्म के माध्यम से पवित्र करें। पंचकर्मों में पवित्रीकरण, आचमन, शिखा वंदन, प्राणायाम और ध्यान शामिल हैं। फिर मंदिर की साफ-सफाई करके गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। उसके बाद देवी पूजन के लिए मां गायत्री की प्रतिमा के सामने बैठकर सच्चे मन से देवी मां को स्मरण करें। देवी को स्मरण करते हुए उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं साथ ही साथ मां को जल, अक्षत, पुष्प, धूप और नैवेद्य भी अर्पित करें। ध्यान रखें कि वही पर आसन बिछाकर गायत्री मंत्र का जप 108  करना न भुलें। गायत्री जयंती पर गायत्री मंत्र का जप करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। जाप पूर्ण हो जाने के बाद मां को भोग लगाएं। ऐसे पूजा करने से मां का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता है।

गायत्री जयंती की कथा व महत्व- 
कथा के अनुसार सृष्टि की रचनी करते हुए ब्रह्मा जी के मुख से गायत्री मंत्र प्रकट हुआ था।  मां गायत्री की कृपा से ब्रह्मा जी ने गायत्री मंत्र की व्याख्या अपने चारों मुखों से चार वेदों के रूप में की थी। आरम्भ में मां गायत्री की महिमा सिर्फ देवताओं तक सिमित थी, लेकिन महर्षि विश्वामित्र ने कठोर तपस्या कर मां की महिमा यानी गायत्री मंत्र को जन-जन तक पहुंचाया। तो वही सनातन धर्म में गायत्री जयंती को विशेष महत्व दिया गया है। कहा जाता है कि मां गायत्री चारों वेदों की जननी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान के साथ जो साधक पूजा करते हैं उसे वेदों वेदों के अध्ययन करने के समान फल की प्राप्ति होती है साथ ही  समस्त मनोकामनाओं का पूर्ति होती है शिक्षा प्राप्त करने वाले और आध्यात्मिक अध्ययन करने वालों के लिए यह दिन अति उत्तम माना गया है। इतना ही नहीं इस दिन गायत्री मंत्र के जाप करने से दुख और दरिद्रता का नाश होता है।


 

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