Hindu Myths: भैंसे को क्यों माना जाता है प्रेत?

Edited By Jyoti,Updated: 29 Jul, 2022 11:34 AM

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हिंदू धर्म के कई ऐसे ग्रंथ हैं, जिसमें देवी-देवताओं के अलावा ऐसी कई चीज़ों के बारे में वर्णन किया है जिनके बारे में जानना हर किसी के लिए बेहद जरूरी होता है। असल में कहा जाता है शास्त्रों में वर्णित किसी भी बात को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि...

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
हिंदू धर्म के कई ऐसे ग्रंथ हैं, जिसमें देवी-देवताओं के अलावा ऐसी कई चीज़ों के बारे में वर्णन किया है जिनके बारे में जानना हर किसी के लिए बेहद जरूरी होता है। असल में कहा जाता है शास्त्रों में वर्णित किसी भी बात को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें उल्लेखित बातें किसी न किसी तरह से मानव जीवन के लिए फायेदमंद साबित होती है। अतः शास्त्रों में दी गई बातों को ध्यान में रखना चाहिए साथ ही साथ अपनाना भी चाहिए। तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही तथ्यों या बातों के बारे में जिन्हें जानना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है।

‘क्षमा दान’
क्षमा में कितनी बड़ी शक्ति छिपी हुई है, संभवत: आप इस तथ्य से परिचित न हों। क्षमा केवल एक शब्द नहीं है बल्कि सही प्रकार के जीवन जीने का एक मंत्र है। ऋषियों के अनुसार जब आप किसी व्यक्ति को क्षमा कर देते हैं तब आपके नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं। इस कारण आपका मन हल्का हो जाता है। आप जो ऊर्जा इन नकारात्मक भावों में उलझे रहने में नष्ट करते हैं वही ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में खप सकती है। किसी को क्षमा करने का अर्थ व्यक्ति के समक्ष आत्मसमर्पण कर देना नहीं है। अगर तार्किक दृष्टि से विचार करें तो क्षमा से आपका विकास होता है। क्षमा रूपी सुगंध को कोई कैद नहीं कर सकता। इसकी खुशबू से आप कभी बच नहीं सकते।
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‘भैंसा अशुभ’
भैंसा मृत्यु के स्वामी यमराज का वाहन है। यह मृत्यु का देवता है। इसके अतिरिक्त भैंसा तो प्रेत का रूप है। इसलिए ही शास्त्रों ने भैंसे के दर्शन को अशुभ कहा है।
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‘कुश धारण का कारण’
कुश नॉन कंडक्टर होता है। इसलिए पूजा-पाठ, जप, होम आदि करते समय कुश का आसन बिछाते हैं और पवित्री स्वरूप हाथ की उंगली में धारण करते हैं जिससे बार-बार हाथ को इधर-उधर करने आदि से भूमि का स्पर्श न हो अन्यथा संचित शक्ति ‘अर्थ’ होकर पृथ्वी में चली जाएगी। अगर भूलवश हाथ पृथ्वी पर पड़ भी जाए तो भूमि से कुश का स्पर्श होगा। इस प्रकार आपका पुण्य सुरक्षित रहेगा और आप पवित्र रहेंगे।
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