कैलाश पर्वत रहस्य: पर्वत के चोटियों के बीच स्थित है 2 झीलें

Edited By Jyoti,Updated: 27 Jun, 2022 05:52 PM

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श्रावण का मास आरंभ होने वाला है, जिसके साथ ही देश के हर कोने में सिर्फ एक ही गूंज सुनाई होगी, जो होगी भगवान शंकर के नाम की। बता दें इस बार 14 जुलाई से श्रावण मास आंरभ हो रहा है। हालांकि जो लोग संक्रांति से मास का आरंभ मानेते हैं उनके लिए

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श्रावण का मास आरंभ होने वाला है, जिसके साथ ही देश के हर कोने में सिर्फ एक ही गूंज सुनाई होगी, जो होगी भगवान शंकर के नाम की। बता दें इस बार 14 जुलाई से श्रावण मास आंरभ हो रहा है। हालांकि जो लोग संक्रांति से मास का आरंभ मानेते हैं उनके लिए श्रावण मास 16 जुलाई से शुरु होगा। श्रावण मास में जहां शिव भक्त उनकी पूजा करके उन्हें प्रसन्न करने में जुटे होते हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग देश में स्थित इनकी प्राचीन विभिन्न स्थलों पर जाकर इनका आशीष पाने के लिए इनके दर्शनों को पहुंचाते हैं। इन्हीं स्थलों में एक नाम शामिल है कैलाशमान सरोवर का। बता दें हिंदू धर्म में कैलाश मानसरोवर को सबसे पावन स्थल माना जाता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको कैलाश मानसरोवर से ही जुड़े कुछ ऐसे रहस्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आज भी लोग अंजान है।  
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बता दें कि कैलाश पर्वत 22,028 फीट ऊंचा एक पिरामिड है। ये पूरे साल बर्फ की सफेद चादर में लिपटा रहता है। मान्येता है कि यह पर्वत स्व यंभू है। साथ ही हैरान करने वाली बात ये है कि ये पर्वत उतना ही पुराना है जितनी हमारी सृष्टि। इस अलौकिक जगह पर प्रकाश और ध्वचनि तरंगों का समागम होता है जो ‘ऊं’ की ध्व नि करता है। जिसे करिश्मा से कम नहीं माना जा सकता है  इस पर्वत का स्वमरूप इतना अद्भुत और निराला है। कि यहां पहुंचते ही ऐसा महसूस होता है मानो जन्नत मिल गई हो। यही वजह है इस पर्वत की रहस्यमयी दुनिया के चमत्कारों को कोई नहीं समझ सकता। बताते चलें कि कैलाश पर्वत के हर भाग को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।.इस पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व को क्रिस्टपल, पश्चिम को रूबी और उत्तंर को स्वहर्ण के रूप में माना जाता है।. पौराणिक कथाओं में ये जिक्र मिलता है कि ये स्था्न कुबेर की नगरी है। यहीं से ही गंगा कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है। यहां से भोलेनाथ उन्हेंस अपनी जटाओं में भरकर धरती पर प्रवाहित करते हैं।

 

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इसके अलावा कैलाश पर्वत की चोटियों के बीच में दो झीलें स्थित है। जिनमें से एक को मानसरोवर झील और दूसरे को राक्षस झील के नाम से जाना जाता है। मानसरोवर झील के दर्शन की विशेष महिमा है। जो 320 वर्ग फीट के क्षेत्र में फैली हुई है और इसे दूनिया की सबसे उंची और शुद्ध पानी की झील माना जाता है। इसका आकार सूरज के सामान है। साथ ही ऊं की ध्वनि भी सनाई देती है।  माना जाता है अगर कोई इस झील में एक बार स्नान कर ले तो उसे रूद्र लोक की प्राप्ति होती है। अब बात करते हैं राक्षस झील की इसके बारे में मान्यता है कि इसी झील के पास रावण ने शिव जी की घोर तपस्या की थी। इसलिए इसे रावणताल भी कहा जाता है।. ये झील 225 वर्ग कि.मी. के क्षेत्र में फैली है ।और इसका आकार चंद्रमा के समान है। ये झील खारे पानी की सबसे उंची झील मानी जाती है। इसके अलावा कैलाश पर्वत के चमत्कारों में 7 तरह की लाइटें भी आती हैं। इस पर वैज्ञानिकों का मानना है कि कई बार चुम्बकीय बल आसमान से मिलकर इस तरह की रोशनी पैदा करती हैं। लेकिन विज्ञान से पलट भोलेनाथ के भक्त इसे उनकी महिमा मानते हैं।
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तो चलिए अब आपको सबसे चकित कर देने वाली बात बताते हैं-
बताया जाता है कि जितने भी भोलेनाथ के भक्त इस यात्रा पर निकलते हैं उनमें से कोई भी कैलाश पर्वत की चोटी पर नहीं पहुंच पाया है। माउंट एवरेस्ट से कम ऊंचाई होने के बाद भी यहां पर अबतक कोई नहीं पहुंच पाया है। कहते हैं जिसने भी इस पर्वत पर जाने की कोशिश की वो या तो पथ भ्रष्ट हो गया या फिर बर्फानी तुफान की वजह से वो आगे बढ़ नहीं पाया। इसके पीछे वैज्ञानिकों का मानना है कैलाश पर्वत की चोटी पर रेडियो एक्टिव पार्टिकल्स हैं। जिसकी वजह से कैलाश पर्वत तक पहुंच पाना असंभव है।

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