कुछ क्षणों के लिए सीधी होती है मां काली की गर्दन, दर्शन से बनते हैं बिगड़े कार्य

Edited By ,Updated: 16 Dec, 2016 09:11 AM

maa kali mandir

छतीसगढ़ के रायसेन जिले के गुढ़ावल गांव में मां काली का प्राचीन मंदिर स्थित है। जिन्हें मां कंकाली भी कहा जाता है। कहा जाता है कि मां की प्रतिमा वर्ष में एक बार स्वयं अपनी

छतीसगढ़ के रायसेन जिले के गुढ़ावल गांव में मां काली का प्राचीन मंदिर स्थित है। जिन्हें मां कंकाली भी कहा जाता है। कहा जाता है कि मां की प्रतिमा वर्ष में एक बार स्वयं अपनी गर्दन सीधी करती है। उस समय मां के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। 

 

यहां स्थित मां काली की प्रतिमा की गर्दन टेढ़ी बनी हुई है। कहा जाता है कि दशहरे के दिन प्रतिमा की गर्दन सीधी होती है। इस दिन मां की झुकी हुई गर्दन कुछ क्षण के लिए सीधी हो जाती है। माना जाता है कि जिस भक्त को भी माता की सीधी गर्दन देखने का अवसर मिलता है उसके सारे बिगड़े कार्य बन जाते हैं। 

 

मंदिर में मां काली की 20 भुजाअों वाली प्रतिमा स्थापित है। उनके साथ भगवान ब्रह्मा, विष्णु अौर महेश की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मंदिर में पूरा वर्ष मां के भक्तों की भीड़ लगी रहती है परंतु शारदीय नवरात्रों के बाद दशहरे पर भक्तों की अधिक भीड़ उमड़ती है। चैत्र नवरात्र में रामनवमी के दिन विशाल भंड़ारे का आयोजन किया जाता है। कहा जाता है कि जिनके यहां कोई संतान नहीं होती वे यहां आकर श्रद्धा से उल्टे हाथ लगाती है तो उनकी मनोकामनाए अवश्य पूर्ण होती है। जब भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है तो सीधे हाथ का चिन्ह बना दिया जाता है। मंदिर में बहुत संख्या में हाथ बने हुए हैं। 

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