Motivational Concept: दूसरों की भलाई मे ही है शरीर की सार्थकता

Edited By Jyoti, Updated: 18 May, 2022 10:02 AM

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राजा हिरण्यगर्भ शिकार का बड़ा प्रेमी था। जब भी वह शिकार के लिए जाता तो चारों ओर ही हाहाकार मच जाता। वन प्रदेश के जीव बहुत दुखी थे। हिरणों में एक बड़ा अद्भुत हिरण था। वह वन के जीवों के दुख से बड़ा ही दुखी रहता था।

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राजा हिरण्यगर्भ शिकार का बड़ा प्रेमी था। जब भी वह शिकार के लिए जाता तो चारों ओर ही हाहाकार मच जाता। वन प्रदेश के जीव बहुत दुखी थे। हिरणों में एक बड़ा अद्भुत हिरण था। वह वन के जीवों के दुख से बड़ा ही दुखी रहता था। वह सोचता था कि ईश्वर ने खाने के लिए अनेक चीजें पैदा की हैं, फिर भी मनुष्य जीवों का शिकार क्यों करता है? उसने इस बात को लेकर राजा के पास जाने का निश्चय किया।

सुबह का समय था। राजा शिकार के लिए तैयार हो रहा था। अचानक एक सुन्दर हिरण राजा के सामने खड़ा हो गया। राजा उसे देखकर चकित रह गया। इतने में वह बोल उठा, ‘‘राजन आप प्रतिदिन वन में जाकर जीवों का शिकार करते हैं। मेरे शरीर के भीतर कस्तूरी का भंडार है। आपसे प्रार्थना है कि आप इस भंडार को ले लें और वन के प्राणियों का शिकार करना छोड़ दें।’’

हिरण की बात सुनकर राजा बोला, ‘‘क्या तुम उन्हें बचाने के लिए अपने प्राण देना चाहते हो? 

तुम जानते हो कस्तूरी पाने के लिए मुझे तुम्हारा वध करना होगा।’’ हिरण बोला, ‘‘राजन आप मुझे मारकर कस्तूरी का भंडार लें परन्तु निरपराध जीवों का वध करना छोड़ दीजिए।’’

राजा ने पुन: कहा, ‘‘तुम्हारा शरीर बहुत सुन्दर है।’’ हिरण ने जवाब दिया, ‘‘राजन यह शरीर तो नश्वर है। मैं दूसरों के प्राण बचाने के लिए मर जाऊं, इससे अच्छी बात क्या हो सकती है।’’ 

हिरण की ज्ञान भरी वाणी ने राजा के मन में वैराग्य पैदा कर दिया। वह सोचने लगा कि यह जानवर होकर भी दूसरों के लिए अपने प्राण दे रहा है और मैं मनुष्य होकर रोज-रोज जीवों को मारता हूं। उस दिन से राजा जीवों की हिंसा छोड़ कर प्राणी मात्र पर दया करने लगा। नश्वर शरीर की सार्थकता इसी में है कि उससे दूसरों की भलाई हो।
 

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