Niti Gyan In hindi: अहंकार को त्याग दें, सफलता पाने में नहीं आएगी बाधा

Edited By Jyoti, Updated: 22 May, 2022 11:40 AM

niti gyan in hindi

देवगुरु आचार्य बृहस्पति के पुत्र कच को ब्रह्म साक्षात्कार करने की इच्छा हुई। इसके लिए वह वन में जाकर तप करने लगा। वर्षों बीत गए। एक दिन आचार्य उसे

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देवगुरु आचार्य बृहस्पति के पुत्र कच को ब्रह्म साक्षात्कार करने की इच्छा हुई। इसके लिए वह वन में जाकर तप करने लगा। वर्षों बीत गए। एक दिन आचार्य उसे देखने वन में गए। वहां उन्होंने देखा कि कच बहुत ही कम आहार लेता था।

बृहस्पति ने उससे पूछा, ‘‘पुत्र! तुमने तप करके क्या पाया?’’ कच बोला, ‘‘पिता जी! मैंने सारे सुखों का त्याग कर दिया है, फिर भी मुझे ब्रह्म साक्षात्कार नहीं हुआ।’’

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इस पर बृहस्पति ने कहा, ‘‘पुत्र! सब कुछ त्याग देने से तप सफल होगा।’’ अब कच ने सभी वस्त्रों व भोजन का पूर्ण त्याग कर दिया और कड़ी तपस्या में जुट गया।

कुछ वर्षों पश्चात बृहस्पति फिर उससे मिलने पहुंचे। पूछने पर इस बार भी कच ने पहले वाला ही उत्तर दिया। इस पर आचार्य बृहस्पति ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘पुत्र! सर्व त्याग का अर्थ न तो वस्त्र उतार देना है और न ही आहार छोड़ देना है। तुम शारीरिक तप तो कर रहे हो, परन्तु आंतरिक तप अभी भी नहीं हो पा रहा है। सर्व त्याग का अर्थ अपने अहंकार को त्याग देना है। तुम्हें ब्रह्म को पाने के लिए अहं को त्यागना पड़ेगा।

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वर्तमान में तुम्हें अपने जिस त्याग पर अभिमान है और जिस इंद्रियदमन को तुम तप समझ रहे हो, वही तुम्हारी साधना की सफलता में बाधा बन रहा है।’’ कच को उनका कहा समझ में आ गया और वह अहंकार त्याग भक्ति भाव से साधना में रत हो गया। ऐसा करते ही उसे ब्रह्म साक्षात्कार हो गया।

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