वास्तु की दृष्टि से भी बेहद फायदेमंद है दिल्ली में हो रहा पौधरोपण

Edited By Jyoti, Updated: 04 Jun, 2022 11:29 AM

plantation in delhi

दिल्ली में पौधरोपण तेजी से किया जा रहा है। इसका असर भी दिखाई दे रहा है। दिल्ली का वन क्षेत्र तीन फीसदी के करीब बढ़ गया है। लेकिन, राजधानी की जनसंख्या को देखे हुए यहां पर वृक्षों की बहार होनी चाहिए।

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दिल्ली में पौधरोपण तेजी से किया जा रहा है। इसका असर भी दिखाई दे रहा है। दिल्ली का वन क्षेत्र तीन फीसदी के करीब बढ़ गया है। लेकिन, राजधानी की जनसंख्या को देखे हुए यहां पर वृक्षों की बहार होनी चाहिए। दिल्ली की यही दरकार है। तकरीबन 2 करोड़ लोगों के लिए पेड़ों की संख्या भी बहुत ज्यादा होनी चाहिए। चूंकि दिल्ली में हर तरफ निर्माण होता ही जा रहा है। इसके साथ जनसंख्या भी बढ़ती जा रही है। देशभर से लोग यहां आकर नौकरी और काम में लगते हैं। ऐसे में यहां पर पर्यावरण में प्रदूषण कम हो और ऑक्सीजन पर्याप्त रूप से उपलब्ध रहे, इसके लिए जरूरी है कि वृक्षों की संख्या और भी तेजी से और बढ़ी संख्या में बढ़ाई जाए। यहीं नहीं इंसानों के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के साथ वृक्ष वातावरण में वाहनों आदि से होने वाले प्रदूषण को भी कम करते हैं। ऐसे में ऑक्सीजन पर्याप्त रूप से होने के लिए और प्रदूषण को खत्म करने, दोनों के लिए ही पेड़ों का बड़ी संख्या में होना जरूरी है। अधिक से अधिक पेड़ होंगे तो दिल्ली वालों को स्वस्थ सांसें नसीब होती रहेंगी। 
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फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून द्वारा मार्च में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 2013 के मुकाबले हरित क्षेत्र में 3 फीसद से अधिक की वृद्धि हुई है। 2013 में जहां दिल्ली का हरित क्षेत्र 20 फीसद था वहीं 2021 में यह बढ़कर 23.6 फीसद हो गया है। दिल्ली ने इसके अलावा 2021-22 में निर्धारित 31 लाख पेड़ रोपने के लक्ष्य को भी हासिल कर दिया है। 2021-22 में दिल्ली को कुल 31 लाख पेड़ रोपने थे जिसके स्थान पर दिल्ली ने 32 लाख पेड़ रोप दिए गए थे। 

दिल्ली का वनीकरण क्षेत्र 9.6 स्क्वायर मीटर पर कैपिटा है। नीकरण के कारण दिल्ली के विभिन्न भागों में जीवन प्रत्याशा में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। पश्चिमी दिल्ली डिवीजन में सर्वाइवल रेट 80.2 फीसद, नजफगढ़ रेंज 75.7 फीसद, महरौली 72 फीसद, असोला भाटी 81.3 फीसद पाया गया है।

बता दें वास्तु शास्त्र में पौधों को काफी महत्व प्रदान किया गया है। कहा जाता घर आदि में विभिन्न प्रकार के पौधों को लगाने से न केवल घर से वास्तु दोषों को तो दूर करता ही हैं साथ ही साथ घर में रह रहे लोगों के जीवन की समस्याओं को भी दूर करते हैं। तो वहीं पौधों से जुड़े कई तरह चिकित्सक लाभ भी हैं। अतः दिल्ली में हो रहा पौधरोपण ने केवल सेहत के लिहाज से बल्कि वास्तु शास्त्र की दृष्टि से भी बेहद लाभदायक माना जा रहा है। 

दिल्ली में सर्वाधिक पाए जाने वाले पेड़- अमलतास, सुबबूल, बबूल, पिलखन, विलायती बबूल, सिल्वर ओक, नीम, यूकेलिप्टस, पीपल, जामुन।
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यहा जानिए इन पेड़ों से मिलने वाले लाभ- 

जामुन : पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में भी फायदेमंद है। खून की कमी को पूरा करता है। विटामिन सी और आयरन के साथ हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है जामुन।  

बबूल : बबूल औषधीय पेड़ है जो कई रोगों में लाभकारी है। बबूल की दतून से लोग दांत साफ करते हैं। जलन, पसीने की समस्या, कमर दर्द, चोट, खुजली, खांसी में लाभकारी।

यूकेलिप्टस : पुदीना के समान, यूकेलिप्टस तेल का इस्तेमाल भी सोने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लामेंट्री गुण नाक और गले में मौजूद म्यूकस को साफ करते हैं जिससे सांस लेने का रास्ता खुल जाता है और बेहतर नींद आती है। साथ ही सीधी होने के कारण इसकी लकड़ी का बल्ली, डंडे, फर्नीचर, ईंधन आदि में खूब इस्तेमाल किया जाता है।  

पिलखन : इस पेड़ से दूध निकलता है। इसके  फूल गुलर जैसे और फल पीपल की भांति होते है। पका हुआ फल पौष्टिक होता है। इसके फल का अचार भी बनाया जाता है। स्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, घाव के लिए रामबाण, दांतों का दर्द, त्वचा में जलन में कारगर।
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सिल्वर ओक : इस पेड़ की लकड़ी सड़ती नहीं है। इसका उपयोग फर्नीचर, कैबिनेटरी, घर या खेत की बाड़ लगाने के लिए किया जाता है। हाल ही में इसकी लकड़ी का उपयोग गिटार पर पाश्र्व और पीछे की लकड़ी के लिए भी किया जाता है। 

सुबबूल : यह बहुपयोगी वृक्ष है। पोषक तत्वों से भरपूर इसकी पत्तियां पशुओं के लिए बेहतर चारा है। खूबी ये कि यह गर्मी में उस समय मिलती हैं, जब चारे की भारी कमी रहती है। चारे के अलावा लकड़ी ईधन और घर बनाने के काम आती है।

नीम : प्राचीन काल से औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है नीम। पत्ती, छाल, निबोरी(फल) तीनों कई रोगों में लाभकारी हैं। 

विलायती बबूल : इसकी पत्तियों और डंठल का उपयोग मलेरिया के इलाज के लिए किया जाता है। उपयोग बाड़ के रूप में भी करते हैं। 

अमलताश : इसके पत्ते मल को ढीला और कफ को दूर करते हैं। इसके फूल कफ और पित्त को नष्ट करते हैं। फली और उसका गूदा पित्त निवारक है।

पीपल : आंखों, दांतों का रोग, कुक्कुर खांसी, दमा, पेट दर्द, शारीरिक कमजोरी, कब्ज, पेचिस, पीलिया, तिल्ली विकार में लाभकारी।
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