Shri Amarnath Yatra: अमरनाथ यात्रा में होने वाली आपदाओं का कारण वास्तुदोष

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 15 Jul, 2022 09:20 AM

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जम्मू-कश्मीर की लिद्दर घाटी में स्थित हिन्दुओं का पवित्र तीर्थस्थल अमरनाथ एक प्रसिद्ध गुफा मंदिर है। लिद्दर घाटी स्थित यह गुफा, ग्लेशियरों और बर्फीले पहाड़ों से घिरी हुई है, जोकि वर्ष के अधिकांश समय बर्फ से ढंकी रहती है। यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र

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Shri Amarnath Yatra 2022: जम्मू-कश्मीर की लिद्दर घाटी में स्थित हिन्दुओं का पवित्र तीर्थस्थल अमरनाथ एक प्रसिद्ध गुफा मंदिर है। लिद्दर घाटी स्थित यह गुफा, ग्लेशियरों और बर्फीले पहाड़ों से घिरी हुई है, जोकि वर्ष के अधिकांश समय बर्फ से ढंकी रहती है। यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से बने प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं।

अमरनाथ जम्मू-कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में लगभग 140 किलोमीटर दूर समुद्रतल से 13,600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।

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अमरनाथ यात्रा एक वार्षिक तीर्थ स्थल बन गया है, जिसकी यात्रा बालटाल और पहलगाम दोनों रूट पर आधार शिविरों से प्रारंभ होती है। अमरनाथ यात्रा की चढ़ाई काफी कठिन और मुश्किलों से भरी होती है लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुंचते ही सफर की सारी थकान पल भर में छू-मंतर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।

अमरनाथ यात्रा के पूरे रास्ते में तीर्थयात्रियों के लिए भारत के विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों एवं भक्तों द्वारा विभिन्न प्रकार की सुविधाएं जैसे भोजन, चाय, पानी, फल-फ्रुट, दवाईयां इत्यादि की आपूर्ति की जाती है और विश्राम के लिए तंबू लगाए जाते हैं। तीर्थयात्रियों के लिए यह सभी सुविधाएं भक्तों द्वारा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती हैं।

इस गुफा की खोज होने के बाद जब से अमरनाथ यात्रा प्रारंभ हुई है, यहां दुर्घटनाएं और आपदाएं समय-समय पर आती रही हैं। 1928 में गुफा के रास्ते में 500 से अधिक तीर्थयात्रियों और खच्चरों की मौत हुई। 1969 में बादल फटने से 40 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। 1996 में जबरदस्त बर्फबारी के कारण सैंकड़ों तीर्थयात्रियों की मृत्यु हुई। 2012 में सड़क दुर्घटना में 130 यात्रियों की मृत्यु हुई, यह तीर्थयात्री उस टीम का हिस्सा थे, जिन्होंने तीर्थयात्रा में सामुदायिक रसोई स्थापित की थी। 2015 में बालटाल में बादल फटने से कई लोगों की मृत्यु हुई। कई बार तीर्थयात्रियों की मौतें बसों के खाई में गिरने से भी हुई हैं। अमरनाथ गुफा पाकिस्तान के बॉर्डर के करीब है, इस कारण यहां पर समय-समय पर आतंकवादी घटनाएं भी होती रही हैं, जिनमें कई बार तीर्थयात्रियों की मौतें हुई हैं।

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8 जुलाई शुक्रवार 2022 को शाम लगभग 5:30 बजे, पवित्र गुफा मंदिर के बाहर नैऋत्य कोण में लगे तंबुओं में स्थानीय बारिश के कारण आई अचानक बाढ़ ने सैकड़ों तीर्थयात्रियों को बहा दिया। इस हादसे में 16 श्रद्धालुओं के शव मिल चुके हैं और 40 से अधिक तीर्थयात्री लापता हैं।

आईए, अमरनाथ गुफा और उसकी आसपास की भौगोलिक स्थिति का वास्तु विश्लेषण करके देखते हैं कि अमरनाथ यात्रा के प्रति लोगों में इतनी आस्था क्यों है और इसके पीछे होने वाली दुर्घटनाओं और अनहोनियों के क्या कारण हैं?

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अमरनाथ गुफा के पीछे जहां एक ओर उत्तर दिशा में ऊंची पहाड़ियां हैं और आगे की ओर दक्षिण दिशा की ओर ढलान है। वहीं दूसरी ओर पूर्व दिशा में पहाड़ और पश्चिम दिशा में गुफा से सटकर दो पहाड़ों के बीच का ढलान है, जिससे पश्चिम दिशा और नैऋत्य कोण ¼South-West Corner½ में नीचाई है। गुफा की दक्षिण दिशा खुली है, जहां से श्रद्धालु गुफा के अंदर प्रवेश करते हैं। भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार ऐसी भौगोलिक स्थिति बहुत ही अशुभ होती है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि दक्षिण दिशा और नैऋत्य कोण में नीचाई हो, ईशान, आग्नेय और वायव्य कोण तथा उत्तर, पूर्व और पश्चिम दिशा ऊंची हो तो वहां संतान व सम्पत्ति नष्ट होती है। जब से अमरनाथ यात्रा प्रारम्भ हुई है, इन वास्तुदोषों का प्रभाव हमें समय-समय पर देखने को मिलता रहा है और आगे भी मिलता रहेगा।

वास्तुशास्त्र के अनुसार, पूर्व दिशा में ऊंचाई और पश्चिम दिशा में ढलान होना अच्छा नहीं माना जाता है परन्तु देखने में आया है कि ज्यादातर वो स्थान जो धार्मिक कारणों से प्रसिद्ध हैं (चाहे वह किसी भी धर्म से सम्बन्धित हो) उन स्थानों पर पूर्व की तुलना में पश्चिम में नीचाई होती है। उदाहरण के लिए वैष्णो देवी मंदिर (जम्मू), पशुपतिनाथ मंदिर (मंदसौर) इत्यादि। वह घर जहां पश्चिम दिशा में भूमिगत पानी का स्रोत (जैसे भूमिगत पानी की टंकी, कुंआ, बोरवेल इत्यादि) होता है, उस भवन में निवास करने वालों में धार्मिकता दूसरों की तुलना में ज्यादा ही होती है। अमरनाथ गुफा के पश्चिम दिशा में दो पहाड़ों की बीच नीचाई है, जहां हमेशा बर्फ जमी रहती है। इसी भौगोलिक स्थिति के कारण अमरनाथ गुफा की मुश्किलों से भरी कठिन यात्रा करते हुए हजारों श्रद्धालु वर्षों से खिंचे चले आते हैं और आते रहेंगे।

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मंदिर की भौगोलिक स्थिति पर फेंगशुई का सिद्धांत भी लागू होता है। यदि पहाड़ के मध्य में कोई भवन बना हो, जिसके पीछे पहाड़ की ऊंचाई हो, आगे की तरफ पहाड़ की ढलान हो, ऐसा भवन प्रसिद्धि पाता है और सदियों तक बना रहता है। फेंगशुई के इस सिद्धान्त में दिशा का कोई महत्त्व नहीं है। ऐसा भवन किसी भी दिशा में हो सकता है। अमरनाथ गुफा के पीछे उत्तर दिशा में पहाड़ की ऊंचाई है और आगे की ओर दक्षिण दिशा में ढलान है। इसी कारण यह गुफा प्रसिद्ध है और सदियों से सुरक्षित है।

सरकार को चाहिये कि तीर्थयात्रियों के लिए लगने वाले तंबु, पंडाल, इत्यादि अमरनाथ गुफा के नैऋत्य कोण में न लगायें, ताकि तीर्थयात्री अधिक सुरक्षित रह सकें।

वास्तु गुरू कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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