स्वार्थी दुनिया चढ़ते सूरज को सलाम करती है: श्री कृष्ण विज

Edited By Punjab Kesari,Updated: 23 Mar, 2018 08:44 AM

the selfish world salutes the sun rising sri krishna vij

श्री रामशरणम् आश्रम द्वारा साई दास स्कूल ग्राऊंड में आयोजित रामायण ज्ञान यज्ञ के 5वें दिन स्वामी सत्यानंद द्वारा रचित रामायण सार ग्रंथ की चौपाइयों की व्याख्या करते हुए श्री कृष्ण विज ने राम-भरत संवाद की कथा सुनाते हुए कहा कि यह कटु सत्य है कि

जालंधर (पांडे): श्री रामशरणम् आश्रम द्वारा साई दास स्कूल ग्राऊंड में आयोजित रामायण ज्ञान यज्ञ के 5वें दिन स्वामी सत्यानंद द्वारा रचित रामायण सार ग्रंथ की चौपाइयों की व्याख्या करते हुए श्री कृष्ण विज ने राम-भरत संवाद की कथा सुनाते हुए कहा कि यह कटु सत्य है कि यह स्वार्थी दुनिया चढ़ते सूरज को सलाम करती है। अगर आप के पास धन-सम्पदा खत्म हो जाए तो अपना कहने वाले सगे-बंधु भी छोड़ देते हैं। समाज में नीचा अपने ही दिखाते हैं। अपने ही अपनों को समाज में गिरा देते हैं। दूसरा कोई नहीं गिराता लेकिन भरत ने भाई के लिए सब कुछ त्याग दिया। 


आरण्यकांड की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि राम जब ऋषि अत्री के आश्रम पहुंचते हैं तो वहां सीता की अनसुइया जी से मुलाकात होती है। सीता-अनसुइया संवाद की कथा सुनाते हुए श्री कृष्ण विज ने कहा कि इस दुनिया में पति जैसा संगी कोई नहीं है, जिसका पति संग है उसे किसी भी वस्तु की कमी कभी नहीं होती है। राम जी ऋषि अत्री तथा अनसुइया का आशीर्वाद लेकर शरभंग ऋषि के आश्रम में पहुंचते हैं। राम जी को देख ऋषि शरभंग ने यह कहते हुए कि हे प्रभु मैं आपका बहुत वर्षों से इंतजार कर रहा था, अपने प्राण त्याग दिए। उसकी कर्म क्रिया के उपरान्त श्री राम वन में आगे बढ़ते हैं तो वन में रहने वाले ऋषि-मुनि उन्हें दैत्यों द्वारा किए जा रहे अत्याचार के बारे में बताते हैं। राम जी 10 वर्ष सुतीक्षण ऋषि के आश्रम में रहे। 


एक दिन राम और लक्ष्मण द्वारा शस्त्र धारण करने पर सीता ने श्री राम से कहा कि हे प्रभु जब क्षत्रिय के हाथों में हथियार आ जाते हैं तो 3 अवगुण पहला पर-नारी गमन, दूसरा मित्था भाषण और तीसरा अकारण बैर उत्पन्न हो जाते हैं तो राम जी ने अपने वचनों से सीता को आश्वस्त किया। कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए श्री कृष्ण विज ने कहा कि जब राम अगस्त्य मुनि के आश्रम में पहुंचते हैं तो अगस्त्य मुनि उन्हें पंचवटी में आश्रम बनाने के उत्तम स्थान बताते हैं, तब प्रभु राम तथा लक्ष्मण जी ने पंचवटी में कुटिया का निर्माण किया। शूर्पनखा तथा राम का संवाद सुनाते हुए उन्होंने कहा कि शूर्पनखा ने कहा कि हे राम मैं लंका नरेश की बहन शूर्पनखा हूं। उसने शादी का प्रस्ताव राम के आगे रखा लेकिन राम ने उसे समझाया तो वह लक्ष्मण के पास पहुंच जाती है। 


इस मौके पर श्रीमती रेखा विज ने रामायण की चौपाइयो का पाठ किया। आज की सभा का विश्राम सर्वशक्तिमते परमात्मने श्री रामाय नम: के साथ हुआ। 


सुन्दर कांड पाठ का समापन आज होगा : डा. नरेश बत्तरा
साईदास स्कूल ग्राऊंड में चल रहे सुंदरकांड के पाठ का समापन आज होगा। उक्त जानकारी देते हुए श्री राम शरणम् आश्रम के मुख्य सेवक डा. नरेश बत्तरा ने बताया कि 23 मार्च को प्रात: 6.15 से 8 बजे की सभा में सुंदर कांड पाठ का आरंभ होगा और सायं 4 से 6 बजे की सभा में पाठ का समापन होगा।

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