किसके आवाह्न पर नासिक में त्र्यंबकेश्वर रूप में विराजमान हुए थे महादेव, जानें

Edited By Jyoti,Updated: 20 Jul, 2022 02:24 PM

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श्रावण मास चल रहा है, इस पूरे मास में शिव जी की आराधना की जाती है। कहा जाता है जो व्यक्ति इस पूरे मास में शिव जी की श्रद्धापूर्वक उपासना करता है उस पर देवों के देव महादेव अपार कृपा बरसाते हैं। श्रावण मास में देश में लगभग सभी शिवालयों आदि में शिव...

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श्रावण मास चल रहा है, इस पूरे मास में शिव जी की आराधना की जाती है। कहा जाता है जो व्यक्ति इस पूरे मास में शिव जी की श्रद्धापूर्वक उपासना करता है उस पर देवों के देव महादेव अपार कृपा बरसाते हैं। श्रावण मास में देश में लगभग सभी शिवालयों आदि में शिव भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। तो वहीं खासतौर पर इस दौरान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में अधिक भीड़ देखने को मिलती है। आज हम आपको इन्हीं ज्योतिर्लिंगों में से एक के बारे में आपको जानकारी देने जा रहे हैं। दरअसल हम बात करने जा रहे हैं नासिक के समीप गोदावरी तट के पास स्थित त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की, जिसे विशेषकर कालसर्प दोष के निवारण के लिए जाना जाता है। तो आइए संक्षेप में जानते हैं त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के बारे में- 
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त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के अंदर तीन छोटे-छोटे शिवलिंग स्थापित है, जिन्हें त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। बता दें इन शिवलिंग के चारों तरफ एक रत्न से जड़ा हुआ मुकुट त्रिदेव के मुखोटे के रूप में स्थित है। परंतु प्रचलित पंरपरा के अनुसार यहां आने वाले भक्त इस मुकुट के दर्शन केवल सोमवार को ही कर सकते हैं। इसके अलावा बता दें त्र्यबंकेश्वर मंदिर के पास तीन ब्रह्मगिरी, नीलगिरी और गंगा द्वार पर्वत स्थित हैं। लोक मत के अनुसार यहां ब्रह्मगिरी को शिव स्वरूप माना जाता है। तो वहीं  नीलगिरी पर्वत पर नीलाम्बिका देवी और दत्तात्रेय गुरु का मंदिर स्थित है। इसके अतिरिक्त गंगा द्वार पर्वत पर देवी गोदावरी यानि गंगा मां का मंदिर स्थापित है। 
 

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यहां आने वाले शिव भक्तों को मिलती है पापों से मुक्ति- 
यहां की प्रचलित किंवदंति के अनुसार एक बार की बात है प्राचीन काल में ब्रह्मगिरी पर्वत पर देवी अहिल्या के पति ऋषि गौतम तपस्या करते थे। अन्य लोग व ऋषि गौतम ऋषि से ईर्ष्या करते थे। एक बार सभी ऋषियों ने छल से गौतम ऋषि पर गौहत्या का आरोप लगा दिया। इसके बाद ऋषियों ने गौतम ऋषि को कहा कि इस हत्या के पाप का प्रायश्चित करने के लिए आपको देवी गंगा को यहां लेकर आना होगा। 
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गौतम ऋषि ने अपने पाप से मुक्ति पाने के लिए पार्थिव शिवलिंग की स्थापना की तथा नियमित रूप स प्रत्येक दिन भक्ति भाव से इस शिवलिंग का पूजन करने लगे। गौतम ऋषि के भक्ति भाव से प्रसन्न होकर देवी पार्वती और भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। गौतम ऋषि ने गंगा माता को यहां उतारने का वर मांगा। जिस पर देवी गंगा ने कहा कि अगर महादेव यहां निवास करेंगे तभी वो यहां आएंगी। मां गंगा की इस कामना को पूरे करने के लिए शि वजी त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए। जिसके बाद मां गंगा गौतमी (गोदावरी) के रूप में यहां स्थित हुई। 
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