भुट्टे से लेकर पान गुटखा कैसे बेचे नहीं पता दिल्ली स्कूल टीचरों को

Edited By Riya bawa,Updated: 30 Jun, 2019 03:34 PM

teachers trouble in delhi government s entrepreneurship mindset scheme

दिल्ली सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए...

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग की तर्ज पर एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम कार्यक्रम शुरू किया है। बता दें कि शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 से 12वीं तक इंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम पढ़ाया जाएगा। जिसके लिए बीते पखवाड़े में स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीआरटी) द्वारा सभी 1024 स्कूलों के प्रमुखों के लिए आयोजित किए गए कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम में इस करिकुलम के बारे में जानकारी दे दी गई थी। जिसके समापन पर शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि पूरी दुनिया में 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्रों के लिए इतने बड़े पैमाने पर ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं चलाया जा रहा है। 

इस योजना में नौवीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी स्कूल से बाहर जाकर कुछ भी बेचेंगे और एक हजार रुपये कमाकर स्कूल में जमा करा देंगे। कोई विद्यार्थी जमा नहीं करा पाया तो टीचर को एक विस्तृत फीडबैक रिपोर्ट तैयार करनी होगी। अब दिक्कत यह है कि टीचरों को इस बाबत कुछ नहीं पता। 

इस प्रोजेक्ट के नतीजों के बारे में अगर मैं एक लाइन में कहूं तो हमारा उद्देश्य ये है कि हमारे बच्चे नौकरियों के पीछे न भागें, नौकरियां हमारे बच्चों के पीछे-पीछे आएं। शिक्षा निदेशालय के अनुसार अब स्कूलों में जो दिनभर की क्लासेस का टाइम टेबल बनता है उसे इंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम को ध्यान में रखकर बनाना होगा। 9 पीरियडों में एक पीरियड स्कूलों को प्रतिदिन इस करिकुलम पर रखना होगा। 

दिल्ली टीचर हैं परेशान
टीचरों का कहना है कि ईएमसी योजना लागू करने के लिए उन्हें केवल एक-दो घंटे की ट्रेनिंग दी गई है। वो भी किसी कमरे या हॉल में एक्सपर्ट द्वारा नहीं, त्यागराज स्टेडियम में भीड़ के बीच यह बताया गया कि बच्चों को कारोबार करना कैसे सिखाना है। जो टीचर आर्ट या विज्ञान संकाय के हैं, उन्हें इस बाबत कुछ नहीं मालूम। ट्रेनिंग में यह भी नहीं बताया गया कि बच्चों से कौन सा कामधंधा कराना है। वे बाजार में जाकर पान गुटखा बेचें, सिगरेट बेचें या पटरी पर भुट्टा और पानी की बोतल। उन्हें तो केवल बच्चों को एक नाटक के जरिए यह बताना है कि कारोबारा करना ठीक होता है। बस किसी भी तरह से बच्चों को प्रोत्साहन देना है। 

अगर स्कूलों को सुविधा रहे तो पहला पीरियड ही इंटरप्रेन्योशिप माइंडसेट करिकुलम पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए रखा जाए। अधिकारी ने बताया कि सभी स्कूल प्रमुखों को निदेशालय द्वारा कहा गया है कि स्कूलों में ईएमसी पाठ्यक्रम सही तरीके से पढ़ाया जा रहा है ये सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है।

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