‘हनुमान अंश’ लिखने के लिए विशाल चतुर्वेदी ने छोड़ी डिजिटल दुनिया, 45 दिन में लिखा पहला सीन

Edited By Updated: 10 Sep, 2026 12:18 PM

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‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है और फिल्म 150 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है।

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है और फिल्म 150 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसी बीच फिल्म के लेखक, निर्देशक और निर्माता विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित इस कहानी को लिखने के लिए उन्होंने खुद को डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूर कर लिया था।

कमरे से हटाए सभी डिजिटल डिवाइस
विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि कहानी लिखते समय उन्होंने अपने कमरे से सभी डिजिटल डिवाइस हटा दिए थे। उन्होंने फिल्म की पूरी कहानी पेन और कागज पर लिखी। इसके बाद वह उन पन्नों की तस्वीरें अपने सहायकों को भेजते थे, जो उन्हें डिजिटल फॉर्मेट में टाइप करते थे। विशाल के मुताबिक, इस तरीके से उन्हें बिना किसी रुकावट के कहानी पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली।

कहानी के लिए की थी काफी रिसर्च
विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि इस विषय पर फिल्म बनाने का विचार उनके मन में शुरुआत से ही स्पष्ट था। इसके लिए उन्होंने काफी रिसर्च भी की। उन्होंने अपने निर्माताओं का भी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उन्हें बिना जल्दबाजी के अपनी क्रिएटिव प्रक्रिया के मुताबिक काम करने की पूरी आजादी दी।

पहला सीन लिखने में लगे 45 दिन
विशाल ने बताया कि फिल्म की पूरी कहानी तैयार करने में ज्यादा समय नहीं लगा, लेकिन पहला सीन लिखने में उन्हें करीब 45 दिन लग गए। उनके मुताबिक, फिल्म का पहला सीन बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वही आगे की पूरी कहानी की दिशा तय करता है। एक बार पहला सीन तय होने के बाद बाकी कहानी तेजी से आगे बढ़ने लगी।

15 से 20 दिनों में पूरी की स्क्रिप्ट
विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक, पहला सीन तैयार होने के बाद उन्होंने बाकी पूरी स्क्रिप्ट सिर्फ 15 से 20 दिनों में पूरी कर ली। हाथ से लिखे नोट्स से शुरू हुई उनकी यह रचनात्मक प्रक्रिया अब बॉक्स ऑफिस की सफलता में बदल चुकी है।

आस्था और भक्ति की कहानी को पर्दे पर लाने की कोशिश
‘हनुमान अंश’ के पीछे विशाल चतुर्वेदी की मेहनत और उनका समर्पण साफ नजर आता है। नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित इस फिल्म के जरिए उन्होंने आस्था, भक्ति और प्रेरणा से जुड़ी कहानी को दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की है। फिल्म की सफलता के बीच उनकी लेखन प्रक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

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