Edited By Manisha,Updated: 01 Oct, 2026 01:46 PM

फिल्ममेकर विकास बहल अपनी अगली फिल्म के साथ 90 के दशक के उस दौर को पर्दे पर लाने की तैयारी में हैं, जब ब्रिटेन में पंजाबी संगीत तेजी से अपनी पहचान बना रहा था।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फिल्ममेकर विकास बहल अपनी अगली फिल्म के साथ 90 के दशक के उस दौर को पर्दे पर लाने की तैयारी में हैं, जब ब्रिटेन में पंजाबी संगीत तेजी से अपनी पहचान बना रहा था। फिल्म में जिमी शेरगिल, सिद्धांत चतुर्वेदी, मोना सिंह और अलिज़ेह अग्निहोत्री मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। कहानी उस समय की है, जब प्रवासी युवाओं की एक पूरी पीढ़ी संगीत के जरिए अपनी पहचान, अपनी आवाज और अपनेपन की जगह तलाश रही थी।
ब्रिटेन में पंजाबी संगीत के उभार का दौर
फिल्म की कहानी 1990 के दशक की शुरुआत में ब्रिटेन में सेट है। यह वह दौर था जब अलग-अलग संस्कृतियों के बीच बड़े हो रहे पंजाबी युवाओं ने संगीत को अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बनाया। गैराज, छोटे म्यूजिक स्टूडियो, पायरेट रेडियो स्टेशन और स्थानीय म्यूजिक कार्यक्रम उनके लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और नए संगीत को लोगों तक पहुंचाने का जरिया बने।
ढोल और मॉडर्न बीट्स का अनोखा मेल
उस दौर में पारंपरिक पंजाबी ढोल की धुनें आधुनिक बीट्स और बेसलाइन के साथ मिलकर एक अलग तरह का संगीत तैयार कर रही थीं। युवा पंजाबी कलाकार अपने नए और अलग अंदाज के संगीत के साथ म्यूजिक चार्ट्स में जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे। धीरे-धीरे यह संगीत सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रवासी पंजाबी समुदाय की पहचान को भी मजबूत करने लगा।
संगीत के साथ पहचान और अपनेपन की कहानी
विकास बहल की यह फिल्म इसी सांस्कृतिक बदलाव की पृष्ठभूमि में संगीत, पहचान, परिवार, दोस्ती और अपनेपन की कहानी बयां करेगी। फिल्म में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों, संगीतकारों और परफॉर्मर्स की बड़ी टीम शामिल होगी। इसके जरिए उस दौर को दोबारा पर्दे पर उतारने की कोशिश की जाएगी, जब एक पूरी पीढ़ी ने अपनी पहचान और अपनेपन के लिए खुद अपनी आवाज बनने की राह चुनी।