WTO की बैठक में भारत MSP व मछुआरों के हितों से नहीं करेगा कोई समझौता

Edited By Tanuja, Updated: 11 Jun, 2022 04:27 PM

at wto meet india to look for positive outcome on fisheries agreement

विश्व व्यापार संगठन (WTO) का  मिनिस्टि्रयल सम्मेलन 12-15 जून को जेनेवा में  होने वाला है जिसमें भारत किसानों को दिए जाने वाले न्यूनतम...

 इंटरनेशनल डेस्कः विश्व व्यापार संगठन (WTO) का  मिनिस्टि्रयल सम्मेलन 12-15 जून को जेनेवा में  होने वाला है जिसमें भारत किसानों को दिए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व मछुआरों के हितोंं से कोई समझौता नहीं करेगा। ये संकेत वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने दिए हैं। जानकारी के मुताबिक दुनिया के विकसित देश भारत में किसानों के दिए जाने वाले MSP को लेकर सालों से आपत्ति जाहिर कर रहे हैं। 12-15 जून को जेनेवा में WTO के मिनिस्टि्रयल सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है जिसमें वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भारत का नेतृत्व करेंगे।

 

WTO की बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध के मसले भी उठेंगे और भारत इस मामले में अपना संतुलित दृष्टिकोण रखेगा। बैठक में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे भी उठाए जाएंगे।  सूत्रों के मुताबिक भारत विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के तहत अनाज का निर्यात करने के लिए तैयार है, लेकिन भारत चाहता है कि जरूरतमंद देशों की खाद्य सुरक्षा के लिए दो देशों के बीच सरकारी स्तर पर भी पब्लिक स्टॉक से अनाज निर्यात की इजाजत दी जाए। क्योंकि WFP में अनाज के आयात की काफी लंबी प्रक्रिया होती है और जरूरतमंद देश को समय पर मदद नहीं मिल पाती है। 

 

मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक भारत WTO की बैठक में देश के मछुआरों के हितों से भी कोई समझौता नहीं करेगा। बैठक में वैश्विक स्तर पर मछुआरों को दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म करने पर भी विचार होगा, लेकिन भारत अपने मछुआरों को दी जाने वाली मामूली सब्सिडी को फिलहाल खत्म करने के पक्ष में नहीं है। भारत का कहना है कि विकसित देश व कई अन्य देशों के मुकाबले भारत पहले ही अपने मछुआरों को काफी कम सब्सिडी देता है। ऐसे में भारत चाहेगा कि विकसित देशों की सब्सिडी खत्म की जाए।
 

 उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक भारत WTO की बैठक में वैक्सीन निर्माण के लिए पेटेंट में छूट के साथ तकनीक ट्रांसफर की बात को जोरदार तरीके से रखेगा क्योंकि कोरोना के दो साल के बाद भी विश्व के कई देश वैक्सीन के लिए विकसित देशों के मोहताज है। पेटेंट में छूट से विकसित देशों की कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, इसलिए विकसित देश पेटेंट में छूट का समर्थन नहीं कर रहे हैं।

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