FBM का आरोप: पाकिस्तान में बलूच महिलाओं पर बढ़े अत्याचार, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय खामोश क्यों ?

Edited By Tanuja, Updated: 23 May, 2022 02:43 PM

baloch women facing persecution in pakistan says baloch leader

ब्रिटेन में निर्वासित फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट (FBM) के अध्यक्ष हिरबेयर मर्री ने पाकिस्तान में बलूच महिलाओं के उत्पीड़न का मामला उठाया। हिरबेयर मर्री ने...

लंदन: ब्रिटेन में  फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट (FBM) के अध्यक्ष हिरबेयर मर्री ने पाकिस्तान में बलूच महिलाओं के उत्पीड़न का मामला उठाया है। हिरबेयर मर्री ने  लंदन में दिए अपने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान में बलूच महिलाओं  पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। पाक में बलूच महिलाओं का अपहरण- उत्पीड़न किया जा रहा है। जिन महिलाओं का अपहरण किया जा रहा है, उनके स्वजन के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। FBM  प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानूनों का खुले तौर पर उल्लंघन कर रहा है। 

 

 हिरबेयर मर्री ने कहा कि जब पूर्वी तिमोर और कोसोवो में महिलाओं का अपहरण किया गया और उनकी हत्या कर दी गई तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने मानवीय आधार पर हस्तक्षेप किया, लेकिन बलूचिस्तान के मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चुप्पी क्यों साध ली है। उन्होंने आगे सवाल पूछा कि क्या बलूचिस्तान के लोगों पर अलग मानवीय कानून लागू होता है। क्या पाकिस्तान को जिनेवा सम्मेलनों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून से छूट दी गई है। मर्री ने कहा, समय आ गया है कि सभी बलूच स्वतंत्रता-समर्थक एक साथ आएं। सामूहिक रूप से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के बर्बर अपराधों के खिलाफ आवाज उठाएं।

 

इससे पहले बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के मानवाधिकार सचिव नजीर नूर बलूच ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (UNHCR), ह्यूमन राइट्स वाच (HRW) और पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) सहित मानवाधिकार संगठनों को लिखे पत्र में कहा कि पिछले दो दशकों से, बलूचिस्तान सबसे खराब मानवाधिकारों के उल्लंघन का सामना कर रहा है। सामूहिक सजा के परिणामस्वरूप, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा बलूच जनता को दैनिक आधार पर पीड़ित किया जा रहा है।  उन्होंने आगे कहा कि इन अत्याचारों और मानवाधिकारों के हनन को उजागर करने के लिए, राजनीतिक दलों और बलूचिस्तान के मानवाधिकार संगठनों ने एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वाच जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को स्थितियों को समझाने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

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