तिब्बत की प्राकृतिक संपदा का लगातार दोहन कर रहा चीनः रिपोर्ट

Edited By Tanuja,Updated: 23 Jul, 2022 04:03 PM

china is continuously exploiting the natural resources of tibet

एक मानवाधिकार समूह ने तिब्बत को लेकर चीन के नापाक इरादों की एक बार फिर पोल खोली है। चीन लगातार तिब्बत की प्राकृतिक संपदा का दोहन कर...

बीजिंगः एक मानवाधिकार समूह ने तिब्बत को लेकर चीन के नापाक इरादों की एक बार फिर पोल खोली है। चीन लगातार तिब्बत की प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रहा है। मानवाधिकार समूह ने इसको लेकर अपनी रिपोर्ट बताया है कि पूरे विश्व को अपने तले लाने की महत्वाकांक्षा लिए चीन लगातार तिब्बत की डेमोग्राफी में बदलाव कर रहा है। इन मानवाधिकार समूहों का कहना है कि चीन बड़े स्तर पर तिब्बत को नियंत्रित कर रहा है। साथ ही वो वहां के लोगों के मौलिक अधिकारों का दमन करने के साथ सिविल सोसाइटी को भी नियंत्रित कर रहा है।  

 

 चीन द्वारा साल 2021 में प्रकाशित 40 पन्नों के एक श्वेत पत्र में चीन द्वारा तिब्बत में पर्यावरण को लेकर की गई उपेक्षाओं पर प्रकाश डाला गया है। पेपर में मुख्य तौर पर देश में विकासकार्यों का उल्लेख किया गया है। जिसमें बांधों का निर्माण समेत कई इंफ्रा से जुड़े हुए निर्माण कार्यों के बारे में बताया गया है। इसको लेकर पालिसी रिसर्च ग्रुप का कहना है कि इसमें पेपर में पर्यावरण को पहुंचाए गए नुकसान के बारे में नहीं बताया गया है। तिब्बत में किए जा रहे विकास योजनाओं के बारे में बात करने के बावजूद, अखबार ने वहां प्राकृती को हुए नुकसान को उजागर नहीं किया है।

 

पेपर में स्वच्छ ऊर्जा से उत्पन्न बिजली की बात करते हुए बताया गया है कि इससे कार्बन डाइआक्साइड के उत्सर्जन को कम किया गया है। लेकिन इसके बावजूद तिब्बती लोगों को इस पहल से कोई फायदा नहीं हुआ और वे रात के दौरान बिजली के बिना ही रहते हैं। इस ऊर्जा का इस्तेमाल चीन की मशीनों को चलाने के लिए किया जाता है। आपको बता दें, तिब्बत की पारिस्थितिकी बड़े बांधों के निर्माण से प्रभावित हुई है। तिब्बत को डंप जोन बना दिया गया है। चीन द्वारा तिब्बत के पर्यावरणीय विनाश से नदियां सूख गई हैं, ग्लेशियरों पिघल रहे हैं। साथ ही पर्माफ्रास्ट का पिघलने के कारण बाढ़ और घास के मैदानों को नुकसान पहुंचा है।

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