इबोला का 'तांडव': अफ्रीकी देशों में अब तक 160 संदिग्ध मौतें, WHO ने दी बड़ी चेतावनी; बिना वैक्सीन वाले वायरस से दुनिया में हड़कंप

Edited By Updated: 22 May, 2026 10:00 PM

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दुनिया अभी एक संकट से उबरती है कि दूसरा सर उठाने लगता है। दक्षिण अफ्रीकी देशों में जानलेवा इबोला वायरस ने एक बार फिर कोहराम मचा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए चेतावनी जारी की है कि इस प्रकोप को हल्के में लेना एक...

इंटरनेशनल डेस्कः दुनिया अभी एक संकट से उबरती है कि दूसरा सर उठाने लगता है। दक्षिण अफ्रीकी देशों में जानलेवा इबोला वायरस ने एक बार फिर कोहराम मचा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए चेतावनी जारी की है कि इस प्रकोप को हल्के में लेना एक "बड़ी गलती" साबित हो सकती है।

670 मामले और 160 मौतें: कांगो में मची तबाही
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वायरस ने बेहद कम समय में भयानक रूप अख्तियार कर लिया है। अब तक 670 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 160 लोगों की संदिग्ध मौत हो चुकी है। पड़ोसी देश युगांडा में भी दो मामलों की पुष्टि होने के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

न वैक्सीन, न इलाज: 'बुंडिबुग्यों' वायरस बना सिरदर्द
WHO के अफ्रीका निदेशक मोहम्मद याकूब ने खुलासा किया है कि वर्तमान में फैल रहा इबोला का यह स्ट्रेन 'बुंडिबुग्यों' (Bundibugyo) नाम का वायरस है। सबसे डराने वाली बात यह है कि इस विशिष्ट वायरस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन (टीका) उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रकोप कब तक चलेगा, इसका फिलहाल कोई सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

कैसे फैलता है यह 'अदृश्य दुश्मन'?
इबोला एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इसके फैलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • संपर्क: संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (खून, पसीना आदि) के संपर्क में आने से।
  • दूषित वस्तुएं: संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों को छूने से।
  • शव: संक्रमण से मरे हुए लोगों के शवों के सीधे संपर्क में आने से खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, शरीर में दर्द, उल्टी और दस्त शामिल हैं।

लापरवाही और हिंसा ने बढ़ाई चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अफसोस जताया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संकट की ओर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जितना 'हंटावायरस' जैसे प्रकोपों पर दिया गया था। वहीं, स्थानीय स्तर पर लोगों की लापरवाही और अंधविश्वास ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर इबोला के इलाज वाले टेंटों को जलाने जैसी हिंसक घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है।

सावधान रहने की जरूरत
WHO ने अपील की है कि यह वायरस अन्य देशों में भी फैल सकता है, इसलिए सभी को एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए और संक्रमण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। फिलहाल महामारी विशेषज्ञ इस प्रकोप के फैलने के मुख्य रास्तों और कड़ियों की पहचान करने में जुटे हैं।

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