एशिया और अफ्रीका हितैशी मार्क्सवादी समीर अमीन का निधन

Edited By Tanuja,Updated: 14 Aug, 2018 01:43 PM

egyptian french economist samir amin dies

विश्व विख्यात मार्क्सवादी समीर अमीन (87) निधन हो गया।  अमीन मिस्र की राजधानी काहिरा में सन 1931 में जन्में थे।  काहिरा में रहते हुए फ्रेंच पद्धति में उनकी स्कूली शिक्षा हुई और फिर उच्च शिक्षा के लिए समीर अमीन ने पेरिस यूनिवर्सिटी से राजनीतिक...

लंदनः विश्व विख्यात मार्क्सवादी समीर अमीन (87) निधन हो गया।  अमीन मिस्र की राजधानी काहिरा में सन 1931 में जन्में थे।  काहिरा में रहते हुए फ्रेंच पद्धति में उनकी स्कूली शिक्षा हुई और फिर उच्च शिक्षा के लिए समीर अमीन ने पेरिस यूनिवर्सिटी से राजनीतिक अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। समीर अमीन ने 1957 से 1960 मिस्र सरकार के प्लानिंग डिपार्टमेंट में काम किया। 

समीर अमीन का मानना था कि यूरोप को रूस, चीन और भारत समेत एशिया के अन्य देशों और अफ्रीकी देशों के साथ अधिक सकारात्मक होने की जरूरत है। वो चाहते थे कि यूरोप को अमरीकी दबाव को दरकिनार करते हुए यूरोप और एशिया के साथ आगे बढ़ना चाहिए।लेकिन फिर मिश्र में गमाल अब्दुल नासिर का प्रभाव बढ़ने लगा और वहां से वामपंथियों का दमन तेज हो गया। समीर अमीन को भी बिगड़ते माहौल में 1960 से 1963 तक नए बने देश माली में योजना मंत्रालय से संबद्ध कर भेज दिया गया।

इस दौरान समीर अमीन पेरिस यूनिवर्सिटी से संपर्क में रहे और 1966 में प्रोफेसर बनने के बाद वह पेरिस और सेनेगल की राजधानी डकार में पढ़ाने लगे। समीर अमीन लगभग 4 दशकों तक डकार में रहे। इस दौरान लगभग एक दशक तक वह संयुक्त राष्ट्र के अफ्रीकन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड प्लानिंग के डायरेक्टर रहे। इसके अलावा 1980 से अबतक समीर अमीन थर्ल्ड वर्ल्ड फोरम के अफ्रीकन ऑफिस का संचालन कर रहे थे।

समीर अमीन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां तब बटोरी जब अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र का कार्यक्रम चलाते वक्त उन्होंने यूरोसेंट्रिज्म की बात पहली बार कही। इस शब्द से अमीन का आशय था कि वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र के द्वारा चलाए जा रहे विकास और ह्यूमैनिटेरियन ऐड कार्यक्रमों में पश्चिमी देशों का हित संरक्षित है। अमीन का मानना था कि विकसित देशों द्वारा थर्ल्ड वर्ल्ड में विकास और ऐड के जरिए अपना प्रभाव कायम रखा है. समीर अमीन एक मल्टीपोलर दुनिया की परिकल्पना सामने रखते थे और मौजूदा समय में यूरोप और अमेरिका के प्रभाव वाले वर्ल्ड ऑर्डर को उखाड़ फेंकते हुए नए मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर की बात करते थे। 

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