Indonesia में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद जकार्ता एयरपोर्ट पर सभी उड़ानें रद्द, आसमान में फैला राख का गुबार

Edited By Updated: 06 Sep, 2026 09:58 AM

indonesia flights cancelled at jakarta airport due to volcanic eruption

इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में आज तड़के विस्फोट होने के बाद ज्वालामुखी से निकली राख पश्चिमी इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में फैल गई जिसके कारण जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं।

जकार्ता : इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में आज तड़के विस्फोट होने के बाद ज्वालामुखी से निकली राख पश्चिमी इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में फैल गई जिसके कारण जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी के अनुसार जावा और सुमात्रा के प्रमुख द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित इस ज्वालामुखीय द्वीप में शनिवार को गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिले थे। 

आज सुबह तीन बजकर 53 मिनट पर ज्वालामुखी करीब 30 सेकंड तक फटा। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और न ही लोगों को वहां से हटाने का कोई आदेश जारी किया गया है। ज्वालामुखी के सबसे नजदीक बसी आबादी करीब 16 किलोमीटर दूर है। हालांकि, एजेंसी ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को ज्वालामुखी के सक्रिय स्थल से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है। 

 

इंडोनेशिया के ज्वालामुखी विज्ञान एवं भूवैज्ञानिक आपदा न्यूनीकरण केंद्र ने बताया कि ज्वालामुखी से निकली राख राजधानी जकार्ता और सुमात्रा द्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित लामपुंग प्रांत के कुछ हिस्सों में फैल गई।

 

हवाई अड्डे ने रविवार सुबह जारी एक परामर्श में कहा, माउंट अनाक क्राकाटोआ की बढ़ी हुई ज्वालामुखीय गतिविधि के कारण सुकर्णो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुबह साढ़े 5 बजे से साढ़े 9 बजे तक उड़ान संचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। 

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देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर यात्रियों ने 'रिफंड' (टिकट का पैसा लौटाने) की मांग की और अपना चेक-इन सामान वापस लिया जबकि उड़ानों के प्रस्थान बोर्ड पर रद्द की गई उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ती गई। इंडोनेशिया की ज्वालामुखी विज्ञान एजेंसी और ऑस्ट्रेलिया के 'डार्विन वोल्केनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर' ने उपग्रह तस्वीरों के आधार पर राख के दो गुबारों की पहचान की। 

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राख का पहला गुबार 20,000 फुट की ऊंचाई तक पहुंचा और उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ रहा था। इससे जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा और आसपास के समुद्री क्षेत्र प्रभावित हुए। राख का दूसरा गुबार 50,000 फुट की ऊंचाई तक पहुंचा और पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा था। इसने बैंटन, लामपुंग और बेंगकुलु प्रांतों के कुछ हिस्सों, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य तथा सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया। 

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