बांग्लादेश में डेंगू का बढ़ता प्रकोप, सितंबर में 148 मौतें, अक्टूबर में बढ़ रहा खतरा

Edited By Updated: 03 Oct, 2026 06:55 PM

rising dengue outbreak in bangladesh 148 deaths in september threat persists i

सितंबर 2026 में डेंगू से सबसे अधिक मौतों के बाद बांग्लादेश में अक्टूबर में भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। हालिया बारिश और बदलते मौसम के बीच विशेषज्ञों ने डेंगू के मामलों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई है। इसके साथ ही देश में खसरे का प्रकोप भी जारी है,...

ढाका : सितंबर 2026 में डेंगू से सबसे अधिक मौतों के बाद बांग्लादेश में अक्टूबर में भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है। हालिया बारिश और बदलते मौसम के बीच विशेषज्ञों ने डेंगू के मामलों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई है। इसके साथ ही देश में खसरे का प्रकोप भी जारी है, जिससे अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अब तक बांग्लादेश में डेंगू से कम से कम 245 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 79,620 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अकेले सितंबर में 148 मौतें दर्ज की गईं। इससे पहले अगस्त में 43 और जुलाई में 36 लोगों की मौत हुई थी। यानी इस साल डेंगू से हुई कुल मौतों में करीब 60 प्रतिशत मौतें सितंबर में हुई हैं।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, डेंगू के छह और मरीजों की मौत हुई है, जबकि 1,948 नए मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। देशभर के अस्पतालों में फिलहाल 5,485 डेंगू मरीजों का इलाज चल रहा है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता कि किन इलाकों या अस्पतालों में सबसे ज्यादा दबाव है।

जहांगीरनगर विश्वविद्यालय के मेडिकल एंटोमोलॉजिस्ट कबीरुल बशर ने अक्टूबर में स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई है। उनके पूर्वानुमान मॉडल के अनुसार, सितंबर में हुई बारिश का असर अक्टूबर में भी डेंगू के संक्रमण पर पड़ सकता है। अनुकूल मौसम मच्छरों की सक्रियता को बनाए रख सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के मामलों में संभावित वृद्धि को देखते हुए अस्पतालों में कर्मचारियों, जांच सुविधाओं, जरूरी दवाओं और रेफरल व्यवस्था की पर्याप्त तैयारी जरूरी है। हालांकि, विशेषज्ञों का पूर्वानुमान संभावित स्थिति का संकेत है, इसे निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।

खसरे के प्रकोप से भी बढ़ा अस्पतालों पर दबाव

बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप ऐसे समय में बढ़ रहा है, जब देश पहले से ही खसरे के बड़े प्रकोप का सामना कर रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च से अब तक खसरे के 21,520 पुष्ट मामले सामने आए हैं। वहीं, 1.90 लाख से अधिक लोगों ने खसरे या इससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण चिकित्सा सहायता ली है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल खसरे से 1,100 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है।

डेंगू और खसरे की रोकथाम के तरीके अलग हैं, लेकिन दोनों के कारण अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों, जांच सुविधाओं और बेड की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में डेंगू के इलाज की व्यवस्था मजबूत करने के साथ नियमित टीकाकरण और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखना भी चुनौतीपूर्ण होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जिला स्तर पर मरीजों की संख्या, अस्पतालों में बेड की उपलब्धता और रेफरल में होने वाली देरी से जुड़ा डेटा जुटाना जरूरी है। इससे स्वास्थ्य संसाधनों को उन इलाकों में भेजने में मदद मिल सकती है, जहां उनकी सबसे अधिक जरूरत है।

परिवारों और कारोबार पर भी पड़ रहा आर्थिक असर

डेंगू का असर सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है। मरीजों और उनके परिवारों को जांच, इलाज और अस्पताल तक आने-जाने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। बीमारी के कारण मरीजों के साथ-साथ उनकी देखभाल करने वाले परिवार के सदस्यों की भी काम से अनुपस्थिति बढ़ सकती है।

इसका असर खास तौर पर सीमित आय और कम बचत वाले परिवारों पर अधिक पड़ सकता है। वहीं, कंपनियों और कारोबारों को भी कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कामकाज प्रभावित होने का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण स्थलों, कारखानों, गोदामों और व्यावसायिक परिसरों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की नियमित जांच और उन्हें खत्म करने के उपाय किए जाने चाहिए। स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से मरीजों को दूर के अस्पतालों तक जाने और बड़े रेफरल केंद्रों पर बढ़ने वाले दबाव को कम किया जा सकता है।

सिर्फ फॉगिंग से नहीं रुकेगा डेंगू

मेडिकल एंटोमोलॉजिस्ट कबीरुल बशर के अनुसार, एडीज मच्छर अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं और देश के कई हिस्सों में फैल चुके हैं। ऐसे में डेंगू से निपटना राष्ट्रीय स्तर की चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि जब तक मच्छरों के प्रजनन वाले स्थानों को खत्म नहीं किया जाता, तब तक केवल कीटनाशक फॉगिंग के भरोसे डेंगू पर नियंत्रण पाना मुश्किल होगा। पानी जमा होने वाले स्थानों की पहचान कर उन्हें खत्म करना, नियमित निगरानी और स्थानीय स्तर पर रोकथाम के उपाय डेंगू के प्रसार को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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