तंत्र साधना का आदर्श स्थान है नलखेड़ा में स्थित हैं पांडव कालीन बगलामुखी मंदिर

Edited By Jyoti,Updated: 20 Oct, 2020 05:06 PM

bagalamukhi temple in nalkheda

आगर जिले से 35 किलो मीटर दूर नलखेड़ा में विश्व प्रसिद्ध पीतांबरा सिद्ध पीठ मां बगलामुखी का मंदिर शक्ति एवं शक्तिमान के सम्मिलित प्रभाव से यहां पर की जाने वाली साधना आराधना अनंत गुना फलप्रदा होती है

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आगर जिले से 35 किलो मीटर दूर नलखेड़ा में विश्व प्रसिद्ध पीतांबरा सिद्ध पीठ मां बगलामुखी का मंदिर शक्ति एवं शक्तिमान के सम्मिलित प्रभाव से यहां पर की जाने वाली साधना आराधना अनंत गुना फलप्रदा होती है। कहते हैं जब कभी किसी को शत्रु का भय होता है तो बगलामुखी की साधना आराधना आराधक के लिए फलदायी साबित होती है। वहीं मां की आराधना से शत्रु का स्तम्भन भी होता है। बताया जाता है बगलामुखी मंदिर में स्थापित मां की प्रतिमा महाभारत कालीन है जो भीम पुत्र बरबरी द्वारा स्थापित की गई थी। कताओं के अनुसार यहां पांडवाें ने भगवान कृष्ण के कहने पर मां की आराधना कर विजयश्री का वरदान प्राप्त किया था। 

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कालीपुराण में मां बगलामुखी का वर्णन मिलता है। यहां के लोगों को अनुसार वर्ष की दोनाें नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में भक्ताें का ताता लगा रहता है। वहीं शारदीय व चैत्रीय नवरात्रि के दौरान तंत्र साधना के लिए यहां तांत्रिकों का जमावड़ा भी लगा रहता है। परंतु इस वर्ष जहां चैत्र नवरात्रि पर्व पर कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर भक्तों के दर्शनार्थ पूर्णता बंद रहा, एवं इस दौरान मंदिर में सन्नाटा पसरा रहा। 

तो वहीं अब शारदीय नवरात्रि पर्व पर भी कोविड-19 का ग्रहण लगा हुआ है, जिसके चलते भक्त मंदिर में शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए कर माता के दर्शन सकते हैं। परंतु हवन अनुष्ठान कार्य नहीं कर सकते हैं। इसी के चलते यह माना जा रहा है कि प्रतिवर्ष जहां मंदिर में नवरात्रि पर्व के दौरान लाखों की संख्या में भक्तों पहुंचते थे वहीं इस बार भक्तों की संख्या में काफी कमी आ सकती है। 
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जिला मुख्यालय आगर से 35 किमी दूर नलखेड़ा में पीतांबरा सिद्धपीठ मां बगलामखी का मंदिर है। जहां त्रिशक्ति मां विराजित हैं। बीच में मां बगलामुखी, दाएं, मां लक्ष्मी तथा बाएं मां सरस्वती। प्रत्येक वर्ष  नवरात्रि पर्व के दौरान यहां देश के कई स्थानाें के साथ ही विदेशाें से भी माता भक्त लाखों की संख्या में पहुंचते हैं। जो यहां अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए विशेष हवन अनुष्ठान आदि संपन्न करवाते हैं।

दस महाविद्याओं में बगलामुखी का है विशेष महत्व 
प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है, उनमें से एक है मां बगलामुखी। मां भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियाें में सबसे विशिष्ट है। शास्त्र के अनुसार इस देवी की साधना आराधना से शत्रुओं का स्तम्भ हो जाता है। यह साधक को भोग और मोक्ष दोनाें ही प्रदान करती हैं। 

255 वर्ष पूर्व बनवाया था सूबेदार ने सभा मंडप
यहां की प्रचलित कथाओं व मान्यताओं के अनुसार ग्वालियर रियासत के एक सूबेदार ने संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होने पर गर्भ गृह के बाहर 16 खम्बों वाला आराधना स्थल विक्रम संवत 1815 .सन 1759 . में दक्षिणी कारीगर अबुजी द्वारा निर्मित किया गया था। यह मंदिर सैकड़ों वर्षाे से ही नहीं अपितु सैकड़ों पीढ़ियों से भक्तों के विश्वास का महत्वपूर्ण आधार बनकर नलखेड़ा जिला.आगर में लखुंदर के पावन तट पर स्थित है। 
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कई देवी-देवताओं का भी है वास
मंदिर आहते में स्थित काल भैरव की चमत्कारी प्रतिमा स्थापित है, जो उज्जैन स्थित काल भैरव के समान मद्यपान का सेवन करती हैं। मंदिर के आहते में ही वीर हनुमान, राधा कृष्ण व महाकाल मंदिर भी स्थित है। 

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