पाक युद्धक पोत को डुबोने वाले भारतीय नौसेना के ‘किलर्स’ स्क्वाड्रन को ‘प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड’ सम्मान

Edited By PTI News Agency, Updated: 05 Dec, 2021 05:09 PM

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मुंबई, पांच दिसंबर (भाषा) भारतीय नौसेना के 22वें मिसाइल वेसल स्क्वाड्रन, जिसने 1971 की लड़ाई में कराची बंदरगाह पर बमबारी की थी और पाकिस्तानी नौसेना के युद्धक पोत को डुबोया था, को उसकी विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बुधवार को एक...

मुंबई, पांच दिसंबर (भाषा) भारतीय नौसेना के 22वें मिसाइल वेसल स्क्वाड्रन, जिसने 1971 की लड़ाई में कराची बंदरगाह पर बमबारी की थी और पाकिस्तानी नौसेना के युद्धक पोत को डुबोया था, को उसकी विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बुधवार को एक दुर्लभ सम्मान ‘प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड’ से सम्मानित करेंगे।

नौसेना के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि ‘किलर्स’ नाम से प्रसिद्ध ‘मिसाइल वेसल स्क्वाड्रन’ के गठन को इस साल 50 वर्ष हो गए और पिछले पांच दशकों में इसने समुद्र में आक्रमण की अपनी क्षमता को बनाए रखा है।

मुंबई में स्थित ‘मिसाइल वेसल स्क्वाड्रन’ ने ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन पराक्रम में हिस्सा लिया था और हाल ही में पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा कड़ी किए जाने पर इसकी तैनाती पाकिस्तान के तटवर्ती इलाकों के बहद करीब की गई थी।

स्क्वाड्रन में तैनात एक अधिकारी ने बताया, ‘‘इस स्क्वाड्रन में शामिल जहाज/पोत बहुत तेजी से यात्रा करने की क्षमता रखते हैं और मिसाइल युक्त हैं। इनकी तैनाती भी (सामने मौजूद पक्ष/दुश्मन को) डराने का काम करती है।’’
भारतीय नौसेना द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारतीय नौसेना को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने ‘प्रेसिडेंट कलर्स’ से 27 मई, 1951 को सम्मानित किया था। ‘प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड’ भी ‘प्रेसिडेंट कलर्स’ जैसा ही सम्मान है, बस यह आनुपातिक रूप से छोटे सैन्य समूह या टुकड़ी को दिया जाता है।

22वें मिसाइल वेसल स्क्वाड्रन का औपचारिक गठन अक्टूबर 1991 में मुंबई में हुआ और इसमें वीर क्लास (श्रेणी) के 10 और प्रबल क्लास (श्रेणी) के तीन मिसाइल बोट शामिल थे।

अधिकारी ने बताया, लेकिन ‘किलर्स’ की शुरुआत 1969 की है जब भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए पूर्ववर्ती यूएसएसआर से लिए गए ओएसए 1 क्लास मिसाइल बोटों को सेना में शामिल किया गया था।

उन्होंने बताया कि इन मिसाइल बोटों को बेहद भारी सामान ढोने में सक्षम व्यावसायिक जहाजों की मदद से भारत लाया गया और 1971 की शुरुआत में कोलकाता में इसे सेना में शामिल किया गया। पहले ही साल भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में इन्हें महत्वपूर्ण मिशन सौंपा गया और उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई।

नौसेना के सबसे युवा लड़ाकों ने 4-5 दिसंबर की दरमियानी रात पाकिस्तानी नौसेना पर भीषण हमला किया। अधिकारी ने बताया कि भारतीय नौसेना के जहाजों ‘निर्घात’, ‘निपट’ और ‘वीर’ ने अपने ‘स्टिक्स’ मिसाइल दागे और पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों ‘खैबर’ तथा ‘मुहाफिज’ को डूबो दिया।

उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ कोड नाम वाले इस अभियान को आधुनिक नौसैनिक इतिहास का सबसे सफल अभियान माना जाता है जहां भारतीय सेना से कोई हताहत नहीं हुआ था।

भारतीय नौसेना ने 8-9 दिसंबर की दरमियानी रात एक और हमला किया जिसमें ‘आईएनएस विनाश’ ने दो अन्य युद्ध पोतों के साथ मिलकर छह ‘स्टिक्स’ मिसाइलें दागीं और पाकिस्तानी नौसैनिक बेड़े के टैंकर ‘डाका’ को डूबो दिया और कराची में कियामारी तेल भंडार को काफी नुकसान पहुंचाया।

अधिकारी ने बताया, ‘‘भारतीय सेना (पक्ष) को किसी प्रकार के नुकसान की कोई सूचना नहीं थी। पोतों और नौसैनिकों की इसी बहादुरी के कारण स्क्वाड्रन को ‘किलर्स’ का नाम मिला और भारतीय नौसेना इसे चार दिसंबर को नौसेना दिवस के रूप में मनाती है।’’
नौसेना ने कहा कि स्क्वाड्रन के सैनिकों को युद्ध सम्मान जैसे एक महावीर चक्र, सात वीर चक्र और आठ नौसेना मेडल मिले हैं।

गौरतलब है कि 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध को 2021 में 50 साल पूरे हुए हैं और देश इसे ‘स्वर्णिम विजय वर्ष’ के रूप में मना रहा है।


यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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