फिटमेंट फैक्टर पर टिकी कर्मचारियों की नजर, 8th Pay Commission में कितनी बढ़ेगी सैलरी, जानिए कैसे होता है कैलकुलेशन

Edited By Updated: 23 May, 2026 12:30 PM

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8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार की तरफ से आयोग के गठन को मंजूरी मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कर्मचारियों की सैलरी में आखिर कितनी बढ़ोतरी होगी। इसी बीच...

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा अब और तेज हो गई है। सरकार की तरफ से आयोग के गठन को मंजूरी मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कर्मचारियों की सैलरी में आखिर कितनी बढ़ोतरी हो सकती है। इसी बीच फिटमेंट फैक्टर ही तय करेगा कि नई बेसिक सैलरी कितनी बनेगी। आईए जानते है....

क्या होता है Fitment Factor?
फिटमेंट फैक्टर एक तरह का Multiplier होता है, जिसकी मदद से कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को नए वेतनमान में बदला जाता है। यही कारण है कि हर वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम माना जाता है। इसका असर सिर्फ सैलरी पर ही नहीं बल्कि पेंशन, महंगाई भत्ता (DA), एरियर और अन्य भत्तों पर भी पड़ता है।

कैसे तय होती है नई सैलरी?
नई बेसिक सैलरी निकालने का सीधा फॉर्मूला होता है:

नई बेसिक सैलरी = मौजूदा बेसिक सैलरी×फिटमेंट फैक्टर
अगर फिटमेंट फैक्टर ज्यादा रखा जाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में भी बड़ा इजाफा देखने को मिलता है।

 इससे पहले 7वें वेतन आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था। उस समय न्यूनतम बेसिक सैलरी 7 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये कर दी गई थी।

इसका गणित कुछ इस तरह था:
7000×2.57 = 18000
यानी पुराने वेतन को 2.57 से गुणा करके नई सैलरी बनाई गई थी। हालांकि वेतन आयोग हर 10 साल में लागू होता है, इसलिए यह बढ़ोतरी लंबी अवधि को ध्यान में रखकर की जाती है।

8वें वेतन आयोग में कितना हो सकता है Fitment Factor?
फिलहाल सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.28 से लेकर 3.83 तक हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही पेंशनर्स को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

पहले कैसे बढ़ती थी सैलरी?
पहले के वेतन आयोगों में फिटमेंट फैक्टर जैसा कोई एक तय सिस्टम नहीं था। उस समय वेतन बढ़ाने के लिए पूरी सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाता था। महंगाई भत्ते को जोड़ना, ग्रेड पे बदलना और अलग-अलग भत्तों में संशोधन जैसे तरीके अपनाए जाते थे। लेकिन 6वें और 7वें वेतन आयोग के बाद फिटमेंट फैक्टर को वेतन संशोधन का मुख्य आधार बना दिया गया।

कर्मचारियों की नजर अब किस पर?
अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाह इस बात पर टिकी है कि सरकार 8वें वेतन आयोग में कितना फिटमेंट फैक्टर तय करती है। माना जा रहा है कि इससे लाखों कर्मचारियों की मासिक आय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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