भ्रष्टाचार किया तो होगी 7 साल की कैद

Edited By ,Updated: 30 Apr, 2015 04:12 AM

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केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक 2013 में सरकारी संशोधनों को आज अनुमोदित कर दिया है जिससे ...

नई दिल्ली: केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक 2013 में सरकारी संशोधनों को आज अनुमोदित कर दिया है जिससे इस कानून को भ्रष्टाचार से निपटने के लिए और सख्त बनाया जाएगा तथा भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई 2 वर्ष में पूरी की जा सकेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 
 
प्रस्तावित संशोधनों से भ्रष्टाचार निरोधक कानून को सख्त बनाने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक संधि का प्रभावी तरीके से अनुपालन हो सकेगा। इन संशोधनों के तहत रिश्वत देने और लेने वाले दोनों को कठोर सजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत न्यूनतम 6 महीने से बढ़ाकर 3 वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। जघन्य अपराध की श्रेणी में आने वाले भ्रष्टाचार के मामलों में 7 वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। 
 
भ्रष्टाचार से अर्जित सम्पत्तियों को जब्त करने का अधिकार अब निचली अदालत (विशेष) को दिए जाने का प्रावधान किया गया है। अब तक यह अधिकार जिला न्यायाधीश के पास है। सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ई.पी.एफ.ओ.) के तहत पैंशनभोगियों को न्यूनतम 1,000 रुपए मासिक की पैंशन देने की योजना को स्थायी रूप से मंजूर कर दिया। इससे 20 लाख लोगों को फायदा होगा। अभी  यह  योजना पिछले  माह तक प्रभावी थी। इसे हमेशा के लिए लागू करने का फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
 
सरकार ने देश में शहरी क्षेत्र की कायापलट करने वाली 2 महत्वपूर्ण परियोजनाओं स्मार्ट सिटी मिशन और अटल शहरी रूपांतरण एवं पुनरुद्धार मिशन (अमरूत) के लिए 1 लाख करोड़ रुपए की राशि मंजूर की है जो अगले 5 वर्षों में खर्च की जाएगी। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश में 100 स्मार्ट शहर बनाए जाएंगे। इस परियोजना के वास्ते 5 वर्ष के लिए 48,000 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। अमरूत मिशन के तहत 500 शहरों की कायापलट की जाएगी। इस परियोजना के वास्ते भी 5 वर्ष के लिए 50,000 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है।
 
प्राकृतिक आपदाओं की घटना को देखते हुए सरकार ने सशस्त्र सेना बल (एस.एस.बी.) की 2 बटालियनों को राष्ट्रीय आपदा कार्य बल (एन.डी.आर.एफ.) में परिवर्तित करने का फैसला किया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय आपदा कार्यबल को और मजबूत करने का भी निर्णय लिया गया। ये दोनों बटालियनें पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा अरुणाचल प्रदेश में प्राकृतिक और अन्य आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य का काम देखेंगी। इन बटालियनों को उत्तर प्रदेश के वाराणसी तथा अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया जाएगा।
 
सरकार ने नौवहन (संशोधन) विधेयक 2015 को संसद में पेश करने और अंतर्राष्ट्रीय नौवहन संगठन के ‘जहाज अपशिष्ट  जल  एवं  अन्य  अपशिष्ट प्रबंधन एवं नियंत्रण समझौते 2004’ में शामिल होने को मंजूरी दे दी है। 

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